महोबा । जिला महिला अस्पताल में कर्मचारी भविष्य निधि (सीपीएफ) में करीब एक करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बडी का मामला दिन व दिन गंभीर होता जा रहा है। वरिष्ठ सहायक संतोष वर्मा जिन पर करीब 85 लाख रुपये की अवैध निकासी आरोप आखिरकार एक हफ्ते बाद आडिट टीम के समक्ष पेश हो गए। आडिट टीम अब उनसे पूछताछ करते हुए जरूरी दस्तावेज ले लिए है।
प्रयागराज से आई एजी ऑफिस की तीन सदस्यीय ऑडिट टीम पिछले एक सप्ताह से अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाल रही है। आरोपी के अचानक गायब होने और जरूरी अभिलेख अपने साथ ले जाने से जांच की रफ्तार भी प्रभावित हुई। करीब एक सप्ताह से कार्यालय न आने वाले वरिष्ठ लिपिक जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत हो गए, जिसके बाद टीम के सदस्य उससे पूछताछ कर रही है। संतोष वर्मा ने सीपीएफ पासबुक, सर्विस बुक और अन्य मांगे गए अभिलेख जांच अधिकारियों को सौंप दिए और उसने निकासी और रिकॉर्ड को लेकर अपनी सफाई भी पेश की। आडिट टीम ने सीएमएस डॉ. रमाकांत चैरिहा, वरिष्ठ चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में वरिष्ठ लिपिक से कई घंटों तक पूछताछ की गई। अधिकारियों ने उससे निकाली गई रकम, आवेदन प्रक्रिया, भुगतान के माध्यम और रिकॉर्ड से जुड़े सवाल किए।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संतोष वर्मा की सफाई से जांच टीम संतुष्ट है या नहीं। ऑडिट टीम अब दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान करेगी। हर निकासी की तारीख और माध्यम की होगी जांच मामले की जांच अभी शुरुआती दौर में है। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, ऑडिट टीम उत्तर प्रदेश शासन, स्वास्थ्य महानिदेशालय और जिला प्रशासन की ई-मेल आईडी समेत जरूरी जांच संबंधी विवरण अपने साथ ले गई है। टीम अगले सप्ताह दोबारा महोबा आएगी और मामले की बिंदुवार जांच करेगी। सीएमओ डॉ. विनय कुमार और सीएमएस ने बताया कि जांच जारी है और ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद शासन स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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