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“जेल में हुई दोस्ती, बाहर आते ही बनाया हनीट्रैप गैंग!” “क्या श्वेता-अलका ने कारोबारियों और नेताओं को बनाया निशाना?”

इंदौर में सामने आए चर्चित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग केस ने कई बड़े खुलासों से सनसनी फैला दी है। पुलिस जांच में पता चला है कि जेल में हुई दोस्ती के बाद एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया गया, जो नेताओं, कारोबारियों और रसूखदार लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपए की वसूली करता था। अब इस मामले में कई हाईप्रोफाइल नाम भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।

जेल में बनी पहचान, बाहर शुरू हुआ नेटवर्क: क्राइम ब्रांच के मुताबिक भोपाल निवासी श्वेता विजय जैन इस पूरे गिरोह की मास्टरमाइंड बताई जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि उसकी मुलाकात शराब तस्करी से जुड़ी अलका दीक्षित से जिला जेल में हुई थी। बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों को फंसाकर ब्लैकमेलिंग और उगाही का नेटवर्क खड़ा किया।

कोर्ट ने 6 दिन की रिमांड पर भेजा: डीसीपी (क्राइम) राजेश कुमार त्रिपाठी के अनुसार श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और जितेंद्र पुरोहित को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। फोटो-वीडियो से ब्लैकमेलिंग का आरोप पुलिस जांच में सामने आया है कि लोगों को जाल में फंसाकर उनके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो तैयार किए जाते थे। बाद में इन्हीं के जरिए करोड़ों रुपए की उगाही की जाती थी। पुलिस को शक है कि कई हाईप्रोफाइल लोग इस गिरोह का शिकार हो चुके हैं, लेकिन बदनामी के डर से सामने नहीं आ रहे।

भाजपा पदाधिकारी बताकर बनाता था संपर्क: जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लाखन चौधरी खुद को भाजपा पदाधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करता था। पुलिस के मुताबिक वह प्रॉपर्टी कारोबार की आड़ में संभावित लोगों तक पहुंच बनाता था। वहीं इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा और देवास निवासी जितेंद्र पुरोहित की भूमिका भी जांच के घेरे में है।

दिल्ली तक फैले नेटवर्क के संकेत: पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि गिरोह ने मध्यप्रदेश के अलावा दिल्ली के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाने की कोशिश की थी। पुलिस ‘रेशू’ नाम की एक महिला की तलाश कर रही है, जो कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने में मदद करती थी।

कारोबारी से मांगे गए एक करोड़ रुपए: पुलिस के मुताबिक शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह ठाकुर उर्फ चिंटू ठाकुर को भी इस गिरोह ने निशाना बनाया। आरोप है कि सुपर कॉरिडोर पर उनकी कार रोककर एक करोड़ रुपए की मांग की गई और वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।

ड्रग्स और हथियार तस्करी से भी जुड़े तार: जांच में अलका दीक्षित के ड्रग्स और अवैध हथियार तस्करी से जुड़े लोगों से संपर्क की जानकारी भी सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कई टीमें बनाकर इंदौर और भोपाल में दबिश दी। AI वीडियो एंगल की भी जांच क्राइम ब्रांच आरोपियों के मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया चैट और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। पुलिस को शक है कि कुछ वीडियो AI तकनीक से भी तैयार किए गए हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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