ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर फैसला अमेरिका के रवैये और उसके किए वादों पर निर्भर करेगा। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोसेन रेजाई ने अमेरिका पर बातचीत के दौरान धोखा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर कोई बात नहीं होगी।
रेजाई ने कहा कि ईरान अमेरिकी आर्थिक दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। उनका आरोप है कि अमेरिका ने बातचीत में किए गए वादे पूरे नहीं किए और इसके बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक असुरक्षा बढ़ सकती है।
ट्रम्प ने फिर होर्मुज को बताया अमेरिकी इलाका
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका से जोड़ने वाला दावा किया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ यानी नया अमेरिकी इलाका बताया गया है।
ईरान पहले ही ट्रम्प के इस दावे को खारिज कर चुका है। तेहरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट को किसी एक देश का क्षेत्र बताना अंतरराष्ट्रीय स्थिति के अनुरूप नहीं है।
रेजाई ने परमाणु हथियारों की होड़ को लेकर जताई चिंता
मोसेन रेजाई ने कहा कि ईरान पर अमेरिकी हमले से दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर चिंता बढ़ी है। उनके मुताबिक, दूसरे देशों को अब यह डर हो सकता है कि बिना परमाणु हथियारों के वे बाहरी सैन्य हमलों से सुरक्षित नहीं रह पाएंगे।
रेजाई ने कहा कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपने परमाणु कार्यक्रम की निगरानी कराता रहा है। इसके बावजूद उस पर सैन्य कार्रवाई की गई। उन्होंने दावा किया कि इससे परमाणु अप्रसार व्यवस्था मजबूत होने के बजाय कमजोर हो सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके उत्तरी हिस्से से ईरान की सीमा लगती है, जबकि दक्षिणी हिस्से में ओमान का मुसंदम क्षेत्र आता है।
दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए इस जलमार्ग की अहमियत बेहद ज्यादा है। खाड़ी देशों से भेजे जाने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति भी इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है।
ईरानी राष्ट्रपति ने बातचीत को बताया समाधान का रास्ता
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता और बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान किसी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
पजशकियान के मुताबिक, ताकत और समझदारी के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता है। अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़े तनाव के बीच ईरान ने अपने रुख में किसी तरह की कमजोरी से इनकार किया है।
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