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ईरान-होर्मुज तनाव से तेल कंपनियों की चांदी, 6 दिग्गज कंपनियों ने कमाए 81 अरब डॉलर

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बने संकट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से पेट्रोल-डीजल, बिजली और रोजमर्रा की कई वस्तुएं महंगी हो गईं। हालांकि इस संकट के बीच दुनिया की छह सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने रिकॉर्ड कमाई दर्ज की।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच इन छह प्रमुख तेल कंपनियों ने संयुक्त रूप से करीब 81 अरब डॉलर (लगभग 7 लाख करोड़ रुपये) का मुनाफा कमाया। यह राशि भारत के वार्षिक रक्षा बजट से भी अधिक बताई जा रही है। इसी अवधि में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे वैश्विक महंगाई पर भी दबाव बढ़ा।

होर्मुज स्ट्रेट पर समझौते की उम्मीद से तेल की कीमतों में राहत

हाल के दिनों में ईरान, ओमान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में राहत देखने को मिली। अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत लगभग 5 प्रतिशत गिरकर 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था के तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही के लिए नए नियम बनाए जा सकते हैं, जिससे समुद्री व्यापार अधिक सुरक्षित हो सके और क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीद है।

यमन में भारतीय जहाज पर हमला

तनाव के बीच लाल सागर में यमन के पास भारतीय झंडे वाले कारोबारी जहाज एमएसवी फैजे नूर-ए-औलिया पर हमला हुआ। हमले के बाद जहाज डूब गया, लेकिन राहत की बात यह रही कि उसमें सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया।

वहीं हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के यानबू पोर्ट के पास एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला करने का भी दावा किया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ईरान में राजनीतिक हलचल तेज

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ कुछ सांसद महाभियोग लाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका के साथ संभावित समझौते की दिशा में उठाए गए कदम देश के हितों के खिलाफ हैं।

इसके साथ ही रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि सुरक्षा, विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मामलों में राष्ट्रपति की भूमिका सीमित की जा रही है तथा इन विषयों पर सैन्य नेतृत्व का प्रभाव बढ़ा है।

अमेरिका की चेतावनी और जारी बातचीत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट जल्द खोला जाना चाहिए, अन्यथा अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष किसी समझौते की ओर बढ़ सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल समुद्री मार्ग खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और बीमा कंपनियों का भरोसा बहाल करना भी उतना ही जरूरी होगा। तभी तेल आपूर्ति सामान्य हो सकेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता लौट पाएगी।

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