लखनऊ में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक बुजुर्ग महिला और रिटायर्ड कैप्टन को अपना निशाना बनाया। जालसाजों ने दोनों को कई दिनों तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखने और गंभीर कार्रवाई का डर दिखाकर करीब 1.30 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने पीड़ितों को लगातार धमकाया और उन्हें मानसिक दबाव में रखकर रकम ट्रांसफर कराई।
बताया जा रहा है कि ठगों ने खुद को पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताकर पीड़ितों से संपर्क किया। इसके बाद उनके बैंक खातों और कथित आपराधिक गतिविधियों का हवाला देते हुए गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। करीब पांच दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को निगरानी में रखा गया और किसी से संपर्क न करने की हिदायत दी गई।
ठगों के लगातार दबाव और धमकियों से घबराए पीड़ितों ने उनके बताए खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ तो मामले की शिकायत साइबर पुलिस से की गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और रकम के लेनदेन से जुड़े खातों व आरोपियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और वीडियो कॉल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने पीड़ितों की निजी जानकारी कहां से हासिल की। पुलिस को शक है कि इस गिरोह में कई लोग शामिल हो सकते हैं, जो अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर रहे हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर ठग पहले पीड़ितों की आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद वे पुलिस, सीबीआई, ईडी या दूरसंचार विभाग का अधिकारी बनकर संपर्क करते हैं। बातचीत के दौरान वे फर्जी नोटिस, पहचान पत्र और गिरफ्तारी वारंट दिखाकर पीड़ितों का भरोसा जीतते हैं और उन्हें डराकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि किसी भी सरकारी एजेंसी की ओर से फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह डिजिटल अरेस्ट कर पैसे जमा कराने की मांग नहीं की जाती। ऐसी कॉल आने पर घबराने के बजाय तुरंत कॉल काट दें, किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी दें और संबंधित विभाग या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल स्वीकार करने से बचना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम पिन, पासवर्ड या स्क्रीन शेयरिंग की अनुमति नहीं देनी चाहिए। अगर ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं और cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन रिपोर्ट करें। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, रकम को फ्रीज कराने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।
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