करबला की कुर्बानियों से नम हुई आंखें
मौलाना आमिर मियां सफवी ने करबला का वाक्या सुनाकर लोगों को दीन और सुन्नत के रास्ते पर चलने की दी नसीहत
सबक-ए-कदमी उन्वान से तकरीर का हुआ आगाज़ और हुआ समापन
– कर्बला का वाक़या सुनाते मौलाना आमिर मियां सफ़वी
फतेहपुर। थाना सुल्तानपुर घोष क्षेत्र के सुल्तानपुर घोष गांव में आयोजित जश्ने शोहदा-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस में करबला के शहीदों की याद ताजा की गई। कार्यक्रम में करबला के दर्दनाक वाक्यात और अहले बैत की कुर्बानियों का बयान सुनकर पूरा मजमा गमगीन हो गया। कॉन्फ्रेंस में ख़ुसूसी ख़िताब के लिए नवासा-ए-हुज़ूर अशहाबे मिल्लत, हज़रत मौलाना आमिर मियां सफवी साहब क़िबला (ख़ानकाह-ए-चिश्तिया दीदारिया, करेली प्रयागराज) तशरीफ़ लाए। अंजुमन कमेटी सुल्तानपुर घोष के पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों ने उनका फूल-माला पहनाकर गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। अपने ख़िताब में मौलाना आमिर मियां सफवी मिस्बाही ने अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अहले बैत की फ़ज़ीलत और उनके किरदार पर रोशनी डाली। उन्होंने खातूने जन्नत हज़रत बीबी फातिमा, शेरे खुदा हज़रत मौला अली, इमाम हसन, इमाम हुसैन, हज़रत अब्बास, हज़रत मुस्लिम बिन अकील समेत कई हस्तियों की जिंदगी के पहलुओं को विस्तार से बयान किया। मौलाना ने करबला के तारीखी बयान में हज़रत इमाम कासिम, औन-मोहम्मद, शबीहे मुस्तफा हज़रत इमाम अली अकबर, छह माह के शीरख़्वार हज़रत इमाम अली असगर और अन्य शोहदा-ए-कर्बला की दर्दनाक शहादत का जिक्र करते हुए बताया कि किस प्रकार इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने 72 जांनिसार साथियों और अहले खानदान के साथ दीन-ए-इस्लाम की हिफाज़त के लिए अपनी जानें कुर्बान कर दीं। उन्होंने अपने बयान की शुरुआत और समापन सबक-ए-कदमी के उनवान से किया। इस शब्द की व्याख्या करते हुए बताया कि इसका अर्थ कदम से कदम मिलाकर चलना है। उन्होंने कहा कि जिस तरह रसूले पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इमाम हुसैन को अपने कदमों पर चलाया, उसी तरह इमाम हुसैन ने अपने नाना के बताए हुए रास्ते पर पूरी जिंदगी अमल किया और दीन की सरबलंदी के लिए करबला में बेमिसाल कुर्बानी पेश की। मौलाना ने उपस्थित लोगों को पांच वक्त की नमाज़ की पाबंदी करने, अल्लाह और उसके रसूल की सुन्नतों पर अमल करने तथा नेक रास्ते पर चलने की नसीहत दी। इस दौरान नारा-ए-हैदरी या हुसैन या रसूल अल्लाह इस्लाम जिंदाबाद और नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर की सदाओं से पूरा गांव गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर रसूल और आले रसूल की बारगाह में सलातो-सलाम पेश किया गया तथा मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की गई। इस अवसर पर कारी व मौलाना अनवार अहमद, कारी बिलाल नूरी, कारी मतीन, हाफिज सरवर हबीबी, हाफिज मोअज्जम साहब सहित अनेक उलेमा-ए-किराम और शोहरा मेंबरे रसूल पर जलवा अफरोज रहे। कार्यक्रम के आयोजक शीबू खान (पत्रकार) रहे। वहीं साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार शहंशाह आब्दी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मोहम्मद अनवार (सदर साहब), अनीस बाबा जी, मोहम्मद ज़फर नेता जी, जुबैर, सरफराज आलम, तंजील, मुजनबीन, आलम, सुहैल, नूर अता, रियाज, शहंशाह, रानू, तन्नू, अमान, अरमान, इलियास, दानिश, मुस्तकीम, आफताब आलम चंद, जुनेद हक़, साजिद, सैंकी, दाऊद, राजू सिद्दीकी, मन्नू, मुस्लिम, मेराज, दिलशाद, सलमान, जीशान, फिरदौश, फैज़ सहित गांव एवं क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने शिरकत की।

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