नई दिल्ली। भारत की आर्थिक विकास दर 7.8 प्रतिशत रहने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी। मंगलवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि देश की जनता की इच्छाशक्ति, मेहनत और सामूहिक शक्ति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक विकास हासिल किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए लोगों से गैर-जरूरी खर्च और आयातित वस्तुओं की खरीद कम करने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि अगर जरूरत न हो तो सोना नहीं खरीदना चाहिए। इससे पहले भी प्रधानमंत्री लोगों से अनावश्यक रूप से सोना खरीदने से बचने की अपील कर चुके हैं।
देश की विकास रफ्तार बनाए रखने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि देश के भीतर कुछ लोग निराशा फैलाने और झूठ के सहारे माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। उन्होंने कहा कि देश को इसी गति को बनाए रखते हुए विकास की रफ्तार और तेज करनी होगी।
प्रधानमंत्री ने लोगों से विदेश यात्राओं और विदेश में होने वाली शादियों पर होने वाले खर्च को कम करने की अपील करते हुए मेक इन इंडिया और स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जितना अधिक देश स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर ध्यान देगा, उतनी ही मजबूती से भारत आगे बढ़ेगा।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश की युवा पीढ़ी को एक विकसित भारत सौंपा जाएगा। इसके लिए देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना जरूरी है।
सोने का आयात घटने से रुपये को मिल सकती है मजबूती
भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है। सोने के आयात के लिए विदेशी मुद्रा, मुख्य रूप से डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में सोने की गैर-जरूरी खरीद कम होने से डॉलर की मांग घट सकती है और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सकता है।
इसका असर रुपये की विनिमय दर पर भी पड़ सकता है। रुपये पर दबाव कम होने से वह डॉलर के मुकाबले अपेक्षाकृत मजबूत रह सकता है।
मजबूत रुपये से महंगाई पर भी असर
रुपये की स्थिति मजबूत रहने से कच्चे तेल और दूसरी जरूरी आयातित वस्तुओं की खरीद अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में रुपये में मजबूती से आयात लागत कम होने और महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
कम सोना खरीदा, लेकिन आयात बिल बढ़ा
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने पिछले कारोबारी वर्ष की तुलना में सोने की मात्रा में कमी के बावजूद इसके आयात पर अधिक खर्च किया। इसकी प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। यानी सोने की मात्रा कम होने के बावजूद महंगा सोना खरीदने के कारण कुल आयात बिल बढ़ गया।
फिजिकल गोल्ड की जगह ETF भी विकल्प
निवेश के लिए सोने के आभूषण या सिक्के खरीदने के बजाय गोल्ड ETF जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। फिजिकल गोल्ड की तुलना में ETF में सोने को सुरक्षित रखने के लिए लॉकर की जरूरत नहीं होती और चोरी या रखरखाव जैसी चिंताएं भी कम रहती हैं।
हालांकि, किसी भी निवेश का फैसला अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।
News Wani
