न्यायिक जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
– एसडीएम को ज्ञापन सौंपतेे संगठन के पदाधिकारी
फतेहपुर। बिहार में भरत तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (आरएएम) ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने घटना को मानवाधिकारों और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा प्रहार बताते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की आवाज बुलंद की। शनिवार को राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के जिलाध्यक्ष राजीव मिश्रा एवं अयोध्या प्रभारी शैलेंद्र शास्त्री के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच सदर उपजिलाधिकारी अर्चना अग्निहोत्री को ज्ञापन सौंपते हुए संगठन ने कहा कि यदि भरत तिवारी आत्मसमर्पण की स्थिति में थे अथवा निहत्थे थे, तो उन पर गोली चलाया जाना कानून के शासन और संविधान द्वारा प्रदत्त जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। ज्ञापन में संगठन ने 12 प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि घटना की न्यायिक जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक मुठभेड़ में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। कानूनी कार्रवाई की जाए। मोर्चा ने पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी, परिजनों एवं गवाहों की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की निगरानी में जांच कराने की मांग भी उठाई। संगठन ने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए त्वरित न्यायालय में सुनवाई कराने, साक्ष्य नष्ट करने या छिपाने वालों के विरुद्ध अलग से मुकदमा दर्ज करने तथा दोषियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण न देने की मांग भी की। इस अवसर पर आलोक गौड़, आकाश तिवारी, पायल गुप्ता, सपना सिंह, विकास शुक्ला, रिंकू पांडेय, अभय द्विवेदी, अमोघ दुबे, पंकज तिवारी सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।

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