महोबा। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र में महोबा जिले में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स (NMEO) के तहत मूंगफली बीज वितरण में कथित अनियमितताओं का मामला जोरदार तरीके से उठा। विधान परिषद सदस्य (MLC) जितेंद्र सिंह सेंगर ने नियम-115 के तहत यह मुद्दा सदन में उठाते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
उन्होंने सदन को बताया कि महोबा जिले के कबरई, चरखारी, कुलपहाड़, जैतपुर और पनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से करीब 10 हजार किसानों को मूंगफली बीज वितरित किया जाना था। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार बीज वितरण किसान उत्पादक संगठनों (FPO) एवं वैल्यू चेन पार्टनर के माध्यम से होना था, लेकिन धरातल पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
MLC ने आरोप लगाया कि शासन ने अप्रैल माह में ही मूंगफली बीज उपलब्ध करा दिया था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते वितरण प्रक्रिया 30 जून से शुरू की गई। उस समय तक अधिकांश क्षेत्रों में बुवाई का उपयुक्त समय निकल चुका था, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई केंद्रों पर किसानों से ई-पॉस (e-PoS) मशीन पर अंगूठा लगवाकर सरकारी रिकॉर्ड में मूंगफली बीज वितरण दर्शा दिया गया, जबकि वास्तविकता में किसानों को उड़द या तिल का बीज दिया गया। इसके अलावा, किसानों से 1,500 रुपये से 3,000 रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
जितेंद्र सिंह सेंगर ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा पांचों भंडारण केंद्रों के स्टॉक, वितरण अभिलेखों, ई-पॉस मशीन के डेटा और लाभार्थी किसानों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो सके और किसानों का भरोसा बहाल किया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने राज्य सरकार को इस प्रकरण में आवश्यक एवं त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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