फतेहपुर। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर वर्मा चौराहे स्थित एक समाचार पत्र के कार्यालय में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इससे पूर्व वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि शिवशरण बंधु के नेतृत्व में सुबह हथगाम में एसोसिएशन के सदस्यों ने विद्यार्थी जी की प्रतिमा और चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
वर्मा चौराहे पर आयोजित गोष्ठी में संपादक एवं ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य अमरजीत सिंह ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी ने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि एक मिशन बनाया था। कानपुर में हिंदू-मुस्लिम दंगों को शांत कराने के प्रयास में उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
जिलाध्यक्ष केके तिवारी ने गणेश शंकर विद्यार्थी के जीवन परिचय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी जी का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को प्रयागराज के अतरसुइया में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1913 में कानपुर से साप्ताहिक समाचार पत्र ‘प्रताप’ का प्रकाशन शुरू किया। ‘प्रताप’ केवल एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद करने का माध्यम था। इसके जरिए उन्होंने किसानों, मजदूरों और शोषित वर्गों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
वर्ष 1929 में वे हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी रहे। 25 मार्च 1931 को कानपुर में सांप्रदायिक दंगों को शांत कराने के प्रयास में उन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका जीवन साहस, निष्पक्षता और मानवता की मिसाल है।
गोष्ठी में संपादक जितेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि आज की पत्रकारिता में गणेश शंकर विद्यार्थी के सत्य, निर्भीकता और निष्पक्षता के मूल्यों को अपनाने की जरूरत है। पत्रकारिता को जनहित का माध्यम बनाकर समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना ही विद्यार्थी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर मनोज मिश्रा, सुधीर कुमार, सत्यम सिंह, शेखर अवस्थी, संतोष, सौरभ और अजय सहित ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के तमाम सदस्य मौजूद रहे।
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