कानपूर। शुक्लागंज। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से उन्नाव के शुक्लागंज क्षेत्र के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। चंपा खेड़ा, नितुआ, गगनी खेड़ा और मोहम्मदनगर गोताखोर समेत आसपास के इलाकों में 500 से अधिक घर पानी से घिर गए हैं। कई गलियों में 7 से 8 फीट तक पानी भर जाने के कारण लोगों की सामान्य दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन के लिए नाव ही लोगों का मुख्य सहारा बनी हुई है। काम पर जाने, राशन और दूध जैसी जरूरी चीजें लाने के साथ बच्चों की पढ़ाई के लिए भी लोगों को नाव का इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र में 15 से अधिक नावें मौजूद हैं, लेकिन नाविकों की कमी के कारण सभी लोगों को समय पर नाव उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
एक नाव के जाने के बाद दूसरी नाव के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। इससे नौकरी और मजदूरी करने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कई परिवार बाढ़ के कारण घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं, जिसके चलते कुछ मकानों पर ताले भी नजर आ रहे हैं।
मोहम्मदनगर की गुलनाज ने बताया कि घर में जरूरी सामान खत्म होने के बाद राशन लेने के लिए बाहर निकलना पड़ा, लेकिन नाव का काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। उनका कहना है कि पानी भरने के बाद परिवार के सदस्यों का काम पर जाना भी मुश्किल हो गया है। रात के समय घरों के आसपास पानी जमा रहने से जलीय जीवों का खतरा भी बना रहता है।
स्थानीय निवासी नूर अली ने बताया कि गंगा का पानी बढ़ने पर इलाके में हर साल इसी तरह की स्थिति बनती है। बाढ़ के दौरान लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या आवागमन की होती है। वहीं दिलशाद और तौफीक ने बताया कि रात में नाव नहीं मिलने पर लोगों को बाहर ही रुकने की मजबूरी हो जाती है। बच्चों के स्कूल और कोचिंग जाने पर भी इसका असर पड़ रहा है।
बाढ़ के पानी के घरों के आसपास जमा होने से लोगों में जलीय जीवों को लेकर भी डर बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में किसी तरह आवाजाही हो जाती है, लेकिन रात के समय खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
नाव चालक आयूब ने बताया कि वह सुबह करीब छह बजे से रात नौ से दस बजे तक नाव चलाकर लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाता है। बाढ़ बढ़ने के साथ नावों की मांग भी बढ़ गई है। उसने नाव संचालन के भुगतान में देरी और निर्धारित मेहनताने को लेकर भी परेशानी की बात कही।
बाढ़ के चलते शुक्लागंज के प्रभावित इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था, जरूरी सामान की उपलब्धता और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
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