कानपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की राजनीति में नए गठजोड़ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कानपुर की सभा में गठबंधन को लेकर खुला संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है और 2 अक्टूबर के बाद सहयोगी दलों के साथ चुनावी रणनीति का ऐलान किया जा सकता है।
इसी बीच AIMIM, आजाद समाज पार्टी और अपना दल (कमेरावादी) से जुड़े नेताओं को लेकर संभावित तीसरे मोर्चे की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही है। मीडिया रिपोर्टों में असदुद्दीन ओवैसी, चंद्रशेखर आजाद और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं के संभावित साथ आने की बात सामने आई है। हालांकि, सभी दलों की ओर से अंतिम गठबंधन की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
ओवैसी ने गठबंधन को लेकर दिया संकेत
20 सितंबर को कानपुर में जनसभा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि AIMIM उन दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है, जो भाजपा को रोकने के लिए साथ आना चाहते हैं। उन्होंने गठबंधन को लेकर 2 अक्टूबर तक इंतजार करने की बात कही और संकेत दिया कि इसके बाद पार्टी अपने सहयोगियों के नाम सार्वजनिक कर सकती है।
ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। AIMIM की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अधिक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। वहीं, समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अभी कोई सहमति सामने नहीं आई है।
चंद्रशेखर आजाद को लेकर भी नजरें
संभावित तीसरे मोर्चे में आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के नाम की भी चर्चा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक AIMIM और आजाद समाज पार्टी के बीच संयुक्त मोर्चे को लेकर बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं।
आजाद समाज पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि अगर कोई ऐसा गठबंधन बनता है जिसमें उनकी पार्टी की राजनीतिक भूमिका तय होती है, तो अंतिम निर्णय चंद्रशेखर आजाद ही करेंगे। इससे पहले भी उनकी पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर चर्चा हो चुकी है, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।
पल्लवी पटेल की भूमिका भी अहम
अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल का नाम भी संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा में है। 2024 के लोकसभा चुनाव में अपना दल (कमेरावादी) PDM गठबंधन का हिस्सा रहा था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक समीकरणों में पल्लवी पटेल की भूमिका पर भी नजर है।
हालांकि, पल्लवी पटेल की ओर से नए गठबंधन में शामिल होने को लेकर अंतिम फैसला अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक समीकरण के तौर पर ही देखा जा रहा है।
तीसरा मोर्चा बनने पर बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसी नए मोर्चे का गठन होने पर विपक्षी दलों के बीच सीटों और वोटों के समीकरण को लेकर नई परिस्थितियां बन सकती हैं। खासतौर पर मुस्लिम, दलित और पिछड़ा वर्ग से जुड़े मतदाताओं को लेकर अलग-अलग दलों की रणनीति महत्वपूर्ण हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि AIMIM, आजाद समाज पार्टी और अन्य छोटे दल एक मंच पर आते हैं, तो इसका असर कई विधानसभा क्षेत्रों में विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव सीटों पर कितना होगा, यह उम्मीदवारों, सीट बंटवारे और चुनाव के दौरान बनने वाले स्थानीय समीकरणों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तारीख 2 अक्टूबर मानी जा रही है। AIMIM ने इसी समय के आसपास गठबंधन को लेकर घोषणा करने का संकेत दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि यूपी में कोई नया तीसरा मोर्चा आकार लेता है या अलग-अलग दल स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरते हैं।
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