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गंगा एक्सप्रेसवे की हवाई पट्टी के पास दरकने लगी मिट्टी, छह किलोमीटर तक दिखीं दरारें; प्रशासन सतर्क, यूपीडा ने बताया पूरी तरह सुरक्षित

शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना से जुड़ी शाहजहांपुर जिले की आपातकालीन हवाई पट्टी के आसपास मिट्टी दरकने की घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जलालाबाद तहसील क्षेत्र के पीरू गांव के निकट निर्मित एयरस्ट्रिप के दोनों ओर करीब छह किलोमीटर तक कई स्थानों पर मिट्टी में दरारें और धंसाव जैसे हालात सामने आए हैं। मामले की जानकारी मिलते ही तहसील प्रशासन ने क्षेत्र का निरीक्षण शुरू कर दिया है। वहीं, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने स्पष्ट किया है कि एयरस्ट्रिप पूरी तरह सुरक्षित है और इससे उसकी संरचना या संचालन पर कोई खतरा नहीं है।

जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में हुई लगातार बारिश के बाद एयरस्ट्रिप के किनारों और एक्सप्रेसवे के आसपास बने मिट्टी के ढाल वाले हिस्सों में कई जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर मिट्टी खिसकने की वजह से गहरी दरारें बन गई हैं, जिससे भविष्य में बड़े कटाव की आशंका बनी हुई है। किसानों ने भी चिंता जताई है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो आसपास की कृषि भूमि और संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, दरारें केवल एक-दो स्थानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एयरस्ट्रिप के दोनों ओर लगभग छह किलोमीटर क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। कई स्थानों पर बारिश का पानी मिट्टी के भीतर समा जाने से कटाव तेज हो गया है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसील प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन का कहना है कि बारिश के कारण मिट्टी के कटाव की स्थिति उत्पन्न हुई है, लेकिन विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।

दूसरी ओर, यूपीडा ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि गंगा एक्सप्रेसवे की एयरस्ट्रिप और मुख्य सड़क पूरी तरह सुरक्षित हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, जो दरारें दिखाई दे रही हैं वे केवल बाहरी मिट्टी के ढाल (स्लोप) पर हैं और उनका मुख्य संरचना, रनवे या एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता से कोई संबंध नहीं है। यूपीडा ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया गया है और परियोजना की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जा रही है।

अधिकारियों ने कहा कि मानसून के दौरान ऊंचे मिट्टी वाले ढालों पर सतही कटाव सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे स्थानों पर समय-समय पर मरम्मत, मिट्टी भराई, घास रोपण और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य किया जाता है। प्रभावित हिस्सों का निरीक्षण कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश संबंधित एजेंसियों को दिए गए हैं।

गौरतलब है कि गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण मेरठ से प्रयागराज तक तेज और सुगम यातायात उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। शाहजहांपुर में निर्मित एयरस्ट्रिप विशेष रूप से भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की आपातकालीन लैंडिंग और सैन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है।

रक्षा दृष्टि से भी इस एयरस्ट्रिप का विशेष महत्व है। युद्ध या आपातकाल की स्थिति में लड़ाकू विमान सीधे एक्सप्रेसवे पर उतर सकेंगे। इसी कारण इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल ही में यहां भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों का सफल अभ्यास भी कराया गया था, जिससे इसकी तकनीकी क्षमता प्रमाणित हो चुकी है।

सिविल इंजीनियरों का कहना है कि भारी वर्षा के दौरान यदि ढालों पर जल निकासी पर्याप्त न हो तो ऊपरी मिट्टी में दरारें आ सकती हैं। हालांकि इससे मुख्य सड़क या एयरस्ट्रिप की संरचनात्मक मजबूती पर तत्काल प्रभाव पड़ना आवश्यक नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते स्लोप स्टेबिलाइजेशन, ड्रेनेज सुधार और मिट्टी की मरम्मत कर दी जाए तो ऐसी स्थिति को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात समाप्त होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भेजकर विस्तृत जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही दरारों की मरम्मत कर दी जाए तो भविष्य में किसी बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और यूपीडा ने भी प्रभावित स्थानों का निरीक्षण कर आवश्यक सुधारात्मक कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेसवे और एयरस्ट्रिप पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा आम जनता को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि लगातार हो रही बारिश को देखते हुए पूरे क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

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