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“NATO पर दरार की अटकलें: ईरान जंग में समर्थन को लेकर अमेरिका सख्त, स्पेन-ब्रिटेन पर दबाव की चर्चा”

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन विकल्पों में स्पेन को नाटो से सस्पेंड करना और ब्रिटेन के फॉकलैंड आइलैंड्स पर उसके दावे से अमेरिकी समर्थन वापस लेना शामिल है. यह ईमेल अमेरिकी प्रशासन की उस नाराजगी को साफ दिखाता है जो उसे सहयोगियों द्वारा युद्ध के दौरान बेस, ओवरफ्लाइट और एक्सेस (ABO) न देने की वजह से हुई है.

स्पेन पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी

रॉयटर्स के अनुसार, इस विवाद में स्पेन मुख्य टारगेट बन गया है. स्पेन की सरकार ने अमेरिकी सेना को ईरान पर हमले के लिए अपने बेस या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था. अमेरिका के पास स्पेन में रोटा नेवल स्टेशन और मोरोन एयर बेस जैसे दो अहम ठिकाने हैं. ईमेल में कहा गया है कि स्पेन को सस्पेंड करने का असर सैन्य से ज्यादा प्रतीकात्मक होगा, जिससे दूसरे देशों को कड़ा मैसेज जाए. फिलहाल रॉयटर्स यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि नाटो में किसी देश को निकालने का कोई आधिकारिक नियम है या नहीं.

ब्रिटेन के फॉकलैंड द्वीप पर बदल सकता है रुख

पेंटागन के नोट में एक चौंकाने वाला सुझाव यह है कि अमेरिका, ब्रिटेन के फॉकलैंड आइलैंड्स पर अपने डिप्लोमैटिक सपोर्ट की दोबारा समीक्षा करे. रॉयटर्स के मुताबिक, इन द्वीपों पर ब्रिटेन का कब्जा है लेकिन अर्जेंटीना भी इन पर दावा करता है.  अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, ट्रंप के दोस्त माने जाते हैं. 1982 में इन द्वीपों के लिए ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच छोटा युद्ध हुआ था, जिसमें 650 अर्जेंटीना और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे. ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर को डरपोक तक कह दिया है क्योंकि ब्रिटेन ने शुरू में हमले के लिए अपने दो बेस इस्तेमाल करने से मना कर दिया था.

होर्मुज की खाड़ी बंद हुई, तो ट्रंप हुए नाराज

रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि 28 फरवरी को हवाई युद्ध शुरू होने के बाद जब होर्मुज की खाड़ी बंद हुई, तो ट्रंप इस बात से नाराज थे कि सहयोगियों ने अपनी नौसेना नहीं भेजी. 1 अप्रैल को एक इंटरव्यू में ट्रंप ने नाटो से हटने के सवाल पर कहा है कि अगर आप मेरी जगह होते तो क्या नहीं हटते? पेंटागन के प्रेस सचिव किंग्सले विल्सन ने कहा है कि ट्रंप चाहते हैं कि सहयोगी देश अब ‘कागजी शेर’ बनकर न रहें.

ईरान युद्ध के बाद बिगड़े हालात

रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार, ईरान की मिसाइलें अमेरिका तक नहीं लेकिन यूरोप तक पहुंच सकती हैं, फिर भी कई देश साथ देने में हिचकिचा रहे हैं. ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों का कहना है कि सीधे युद्ध में उतरने से मामला और बिगड़ सकता है, इसलिए वे केवल सीजफायर के बाद समुद्री सुरक्षा में मदद करेंगे. रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका अब नाटो को ‘एकतरफा रास्ता’ नहीं रहने देना चाहता और यूरोपीय देशों की निर्भरता को कम करने के लिए इन विकल्पों पर विचार कर रहा है.

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