न्यूज़ वाणी ब्यूरो, बांदा। जनपद के ग्राम पंचायत उदयपुर में सामाजिक कार्यों के लिए दान में दी गई करोड़ों रुपये की जमीन और मकान को लेकर विवाद सामने आया है। दानकर्ताओं के वारिसों ने एक सामाजिक संस्था के संचालक पर दानपत्र की शर्तों का उल्लंघन कर संपत्ति का निजी उपयोग करने और परिवार के सदस्यों को परेशान करने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि सामाजिक गतिविधियां लंबे समय से बंद हैं, जबकि दान में मिली जमीन पर खेती कर निजी लाभ कमाया जा रहा है। मामले को लेकर परिवार ने मुख्यमंत्री और न्यायालय से न्याय की गुहार लगाई है।
सामाजिक कार्यों के लिए दान की गई थी जमीन
परिजनों के मुताबिक, वर्ष 2000 में स्वर्गीय अनंत प्रसाद, स्वर्गीय सुरेश चंद्र और स्वर्गीय दिनेश कुमार ने कर्मयोग विद्यापीठ के संचालन और सामाजिक गतिविधियों के उद्देश्य से अपनी जमीन और मकान ‘अभियान’ संस्था को दान किए थे। दानपत्र में शर्त रखी गई थी कि यदि संस्था द्वारा विद्यापीठ और सामाजिक कार्य बंद कर दिए जाते हैं, तो संपत्ति मूल दानकर्ताओं या उनके वारिसों को वापस मिल जाएगी।
परिवार का आरोप है कि पिछले करीब 18 वर्षों से विद्यापीठ और सामाजिक गतिविधियां बंद हैं। इसके बावजूद संस्था संचालक अशोक कुमार द्वारा परिसर का उपयोग निजी फार्महाउस के रूप में किया जा रहा है। आरोप है कि वहां आलू, टमाटर और बैंगन की खेती कर व्यावसायिक लाभ लिया जा रहा है।
जमीन खाली कराने को लेकर न्यायालय में मामला विचाराधीन
दानकर्ताओं के वारिसों का कहना है कि उन्होंने दानपत्र की शर्तों का हवाला देते हुए संस्था संचालक से जमीन और मकान खाली करने का अनुरोध किया था, लेकिन उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई। इसके बाद परिवार ने अतर्रा स्थित सिविल न्यायालय में वाद दायर किया है। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है।
पूर्वजों की समाधि पर जाने से रोकने का आरोप
परिवार के अनुसार, दान की गई जमीन पर उनके पूर्वजों की समाधियां भी बनी हुई हैं। आरोप है कि पूरे परिसर में बाउंड्रीवॉल बनाकर मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया है, जिससे परिजन पितृपक्ष, श्राद्ध और अन्य धार्मिक अवसरों पर अपने पूर्वजों की समाधियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
परिजनों ने बताया कि हाल ही में पितृपक्ष के दौरान परिवार के पांच नाबालिग और दिव्यांग बच्चे पूर्वजों की समाधि पर फूल-माला चढ़ाने पहुंचे थे। मुख्य गेट पर ताला लगा होने के कारण बच्चे गेट के ऊपर से अंदर गए और समाधियों पर पुष्प अर्पित करने के बाद वापस लौट आए।
बच्चों पर तोड़फोड़ का आरोप लगाने से बढ़ा विवाद
परिवार का आरोप है कि इस घटना के बाद संस्था संचालक ने पुलिस अधीक्षक और बदौसा थाने में प्रार्थना पत्र देकर बच्चों पर तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया। परिजनों ने शिकायत को निराधार बताते हुए कहा कि बच्चे केवल अपने पूर्वजों की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने गए थे। पुलिस में शिकायत किए जाने के बाद से बच्चे और उनके परिवार के सदस्य मानसिक तनाव में हैं।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। इससे परेशान होकर दानकर्ताओं के वारिसों ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
परिवार ने शासन-प्रशासन और न्यायालय से दानपत्र की शर्तों की जांच कराने, बच्चों को सुरक्षा उपलब्ध कराने और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर दान में दी गई संपत्ति वापस दिलाने की मांग की है। मामले में संस्था संचालक का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना आवश्यक होगा।
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