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अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: ईरानी शादी समारोह पर किया हमला: 5 की हुई मौत, 68 घायल; ईरान का जॉर्डन-बहरीन में जवाबी अटैक

तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान में कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। ईरान का आरोप है कि इन हमलों में एक शादी समारोह भी चपेट में आ गया, जिसमें कई लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं।

ईरान के मुताबिक, अमेरिकी हमला सिरिक के कुहस्तक इलाके में एक रिहायशी घर पर हुआ, जहां परिवार शादी समारोह मना रहा था। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि हमले में महिलाएं और बच्चे भी घायल हुए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या चार से पांच और घायलों की संख्या 50 से 68 के बीच बताई गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

खुजस्तान में भी अमेरिकी हमले का दावा

ईरान ने दावा किया है कि खुजस्तान प्रांत में भी अमेरिकी मिसाइल हमले किए गए। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यहां तीन स्थानों को निशाना बनाया गया, जिसमें सात लोगों की मौत और आठ लोगों के घायल होने की बात कही गई है।

वहीं, अमेरिका का कहना है कि उसके सैन्य अभियान में ईरान के सैन्य ठिकानों और सैन्य क्षमता से जुड़े लक्ष्यों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका की ओर से शादी समारोह को जानबूझकर निशाना बनाए जाने के आरोप से संबंधित अलग से कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।

ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में जवाबी हमले का दावा किया

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया।

हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को खारिज किया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक जॉर्डन में ईरानी हमले में किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार, हमलों की स्थिति अभी भी बदल सकती है।

रूस पर ईरान को मिसाइल तकनीक देने का आरोप

इसी बीच ऐसी रिपोर्टें भी सामने आई हैं कि रूस कथित तौर पर ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीक उपलब्ध करा रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह सहयोग कई वर्षों से चल रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम विकसित कर चुका है और इसका परीक्षण भी किया गया है। हालांकि, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि रूस की मदद से विकसित कोई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरान ने सैन्य रूप से तैनात की है।

होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव का एक प्रमुख कारण होर्मुज स्ट्रेट भी है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश की है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी समुद्री रास्ते से दूसरे देशों तक पहुंचती है। ऐसे में यहां सैन्य तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते हमलों ने पश्चिम एशिया में बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है। दोनों देशों की ओर से जारी दावों के बीच आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की संभावना बनी हुई है।

संयुक्त राष्ट्र ने जताई गंभीर चिंता

लगातार हो रहे हमलों के बीच संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल तनाव कम करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा कि नागरिक इलाकों को किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचाया जाना चाहिए। संगठन ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने को कहा है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर आपात बैठक बुलाए जाने की संभावना है। कई देशों ने आशंका जताई है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव जारी रहा, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है।

खाड़ी देशों ने बढ़ाई सुरक्षा

तनाव बढ़ने के बाद खाड़ी देशों ने अपने हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी है। कई देशों ने हवाई निगरानी और मिसाइल रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर दिया है। कुछ इलाकों में नागरिक उड़ानों के मार्ग भी बदले गए हैं।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपटने के लिए आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है।

तेल की कीमतों में उछाल की आशंका

होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस समुद्री मार्ग से तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक समुद्री यातायात बाधित रहने पर पेट्रोल, डीजल, गैस और परिवहन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर एशिया और यूरोप समेत कई क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका है।

नागरिकों में बढ़ी चिंता

ईरान और आसपास के इलाकों में आम लोगों के बीच डर और चिंता का माहौल है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है।

मानवीय संगठनों ने कहा है कि लगातार हमलों के कारण चिकित्सा सेवाओं, बिजली आपूर्ति और जरूरी सामान की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। संगठनों ने प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाने की मांग की है।

फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ कड़े बयान जारी किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं या सैन्य कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।

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