यूपी के कानपुर में 8 साल की मूक-बधिर बच्ची को महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने उसकी मां से मिलवाया। बच्ची मां को देखते ही खिलखिला उठी। झट से उन्हें गले लगा लिया। मां-बेटी का प्यार देख कॉन्स्टेबल मंदाकिनी भावुक हो गईं।
उन्होंने रोते हुए कहा-
बच्ची में मुझे अपनी बेटी दिखी। मेरे दो बेटे हैं। बेटी नहीं है। हमने सोचा था कि अगर इस बच्ची का कोई नहीं होगा तो इसे मैं पालूंगी।
दरअसल, सोमवार को बच्ची खेलते-खेलते जुलूस के पीछे-पीछे घर से निकल गई। माता-पिता उस वक्त घर पर नहीं थे। माता-पिता घर लौटे तो बच्ची नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने बच्ची को तलाशा, लेकिन वह नहीं मिली। फिर उन्होंने पुलिस को सूचना इधर, पुलिस को गश्त के दौरान बच्ची सड़क किनारे बैठी मिली। पुलिसकर्मियों ने बच्ची को महिला हेल्प डेस्क को सौंप दिया। अगले दिन महिला कॉन्स्टेबल ड्यूटी पर पहुंचीं तो बच्ची ने उनसे खाने का इशारा किया। इसके बाद वह भावुक हो गईं। फिर उन्होंने बच्ची को खाना खिलाया। उसे अपने हाथों से नहलाया और दुलारा।
परिवार से मिलाने के लिए इंस्टाग्राम पर रील पोस्ट की। रील पोस्ट करने के 24 घंटे के भीतर बच्ची की मां थाने पहुंच गई। पूरा मामला ग्वालटोली थाना क्षेत्र का है।
अलम का जुलूस देखते हुए बच्ची घर से दूर चली गई
- नाजिरबाग के रहने वाले काबुल शेख कबाड़ बीनने का काम करते हैं। परिवार में पत्नी रेशमा खातून और तीन बच्चे मायनरा (20), शब्बीर (11) और 7 साल की परवीन हैं। रेशमा ने बताया- परवीन मूक-बधिर है। मायनरा का निकाह हो चुका है।
- 22 जून को मेरी बेटी की डिलीवरी होनी थी, जिसके लिए मैं बेटी के पास गई थी। पति काम पर गए थे। इस दौरान घर में बेटी परवीन और शब्बीर अकेले थे। दोपहर में बेटी घर के बाहर खेल रही थी, तभी तलाक महल से अलम का जुलूस निकला।
- 8 साल की बेटी परवीन जुलूस के पीछे-पीछे चली गई। देर शाम जब मैं घर पहुंची तो बेटी घर में नहीं मिली। बेटे शब्बीर से बेटी के बारे में पूछा तो उसने कहा कि उसे नहीं पता वह कहां गई। इसके बाद आसपास के घरों में खोजबीन की, लेकिन बेटी का कोई पता नहीं चला। फिर उन्होंने पुलिस को मामले की जानकारी दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।पुलिस सोमवार देर रात इलाके में गश्त कर रही थी। शीलिंग हाउस स्कूल के सामने पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस को बच्ची सड़क किनारे बैठी मिली। पुलिसकर्मियों ने बच्ची से पूछताछ की, लेकिन मूक-बधिर होने के कारण वह कुछ बता नहीं पाई। इस पर पुलिसकर्मी उसे थाने लेकर पहुंचे और महिला हेल्प डेस्क में तैनात दरोगा कंचन रागिनी को सौंप दिया।
कॉन्स्टेबल की जुबानी, पढ़िए कैसे मां से मिलवाया
कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने बताया, ‘मैं मंगलवार सुबह 9 बजे महिला हेल्प डेस्क में ड्यूटी पर पहुंचीं तो गंदे कपड़े पहने बच्ची बैठी हुई थी। उसने मेरा हाथ पकड़कर खाना खिलाने का इशारा किया। मैंने उससे इशारे में पूछा कि भूख लगी है? जिस पर उसने हां में सिर हिलाया। फिर मैंने आनन-फानन में थाने की मेस से बच्ची के लिए छोले, चावल और रोटी लेकर आई। उसे प्यार से बैठाकर खाना खिलाया।
पेट भरने के बाद बच्ची ने मंदाकिनी को दुलार किया। फिर बच्ची ने नहलाने का इशारा किया। इसके बाद मैंने थाना परिसर में लगे हैंडपंप पर बच्ची को नहलाया। दरोगा कंचन रागिनी बच्ची के लिए दो टी-शर्ट और पैंट खरीदकर लाईं। कपड़े देखकर परवीन खुश हो गई। झट से उसने नए कपड़े पहन लिए। इसके बाद उन्होंने बच्ची को उसके परिजनों से मिलाने के लिए इंस्टाग्राम पर रील पोस्ट की। कुछ ही देर में पोस्ट वायरल होने लगी।
उधर, बच्ची की मां रेशमा कर्नलगंज थाने पहुंचीं, जहां पुलिस ने उन्हें दरोगा की रील दिखाई। वीडियो देखते ही रेशमा की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने हामी भरते हुए कहा- हां साहब, यही मेरी बेटी है। बुधवार दोपहर करीब 1 बजे बच्ची की मां रेशमा, बुआ संजेमा खातून और मौसी साबिया ग्वालटोली थाने पहुंचीं। यहां उनकी मासूम बच्ची बैठी थी। मां को देखते ही बच्ची ने पहचान लिया।’
कॉन्स्टेबल मंदाकिनी के बारे में जानिए
कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा- मैं मूलरूप से मैनपुरी की रहने वाली हूं। ससुराल फिरोजाबाद में है। एक साल पहले ग्वालटोली थाने में तैनात हुई हूं। मेरे दो बेटे हैं, जिनकी उम्र 2 और 1 साल है। भगवान ने मुझे बेटी नहीं दी है। मैंने अपनी बेटी की तरह बच्ची को नहलाया-खिलाया। इस बात की खुशी है कि वीडियो के जरिए बच्ची माता-पिता से मिल गई।
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