महोबा। दस करोड़ नशा मुक्ति प्रतिज्ञा अभियान के तहत जिला उपकारागार में ब्रह्माकुमारीज संस्थान के तत्वावधान में जनजागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपकारागार में निरुद्ध बंदियों को नशा मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित किया साथ ही स्वस्थ और अनुशासित जीवन शैली के प्रति जागरूक किया। इस मौक पर करीब 350 बंदियों को राजयोग मेडिटेशन और सकारात्मक चिंतन के माध्यम से नशामुक्त जीवन अपनाए जाने के प्रति पे्रेरित किया। यह कार्यक्रम क्षेत्रीय संचालिका बीके सुधा बहन के सानिध्य में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य बंदियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और उन्हें स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन शैली की ओर प्रेरित करना था।
जनजागरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके सुदामा बहन ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन और सकारात्मक चिंतन के माध्यम से मन को शांत करके बुरी आदतों और व्यसनों से मुक्ति पाने की प्रेरणा मिलती है और यह प्रक्रिया आंतरिक शक्ति जगाती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है। कहा कि रोज सुबह ध्यान का अभ्यास करें, अच्छे और प्रेरणादायक विचार पढ़ें और बुरे दोस्तों की संगत छोड़ने से नशा से काफी हद तक दूर रहा जा सकता है। बीके रागिनी बहन ने कहा कि नशा हर बुराई और विनाश की जड़ है। यह इंसान की सोचने समझने की शक्ति, विवेक और अच्छे बुरे की पहचान को खत्म कर देता है। इसके सेवन से व्यक्ति न सिर्फ अपना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बर्बाद करता है, बल्कि अपने हंसतेखेलते परिवार को भी संकट और दुखों में डाल देता।
जेलर प्रिय कुमार ने कहा कि मूल्य शिक्षा और व्यक्तिगत संकल्प ही नशामुक्त समाज के निर्माण की असली कुंजी है। इस मौके पर वक्ताओं ने नशे के गंभीर दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए आत्मनियंत्रण और सकारात्मक सोच के महत्व को रेखांकित किया साथ ही नशा नाश की जड़ है का संदेश भी प्रमुखता से दिया गया। कार्यक्रम में बीके साधना, बीके बबीता, रिचा, हेमा, प्रतीक्षा, हरिकृष्ण जीतू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजयोग और ध्यान सत्रों ने बंदियों को अपनी सकारात्मक क्षमता पहचानने का अवसर दिया। इस मौके पर सभी कैदियों ने सामूहिक रूप से जीवन भर नशामुक्त रहने का दृढ़ संकल्प लिया।

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