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ईरान पर फिर मंडरा रहा अमेरिकी हमले का खतरा, 4 नवंबर से सैन्य कार्रवाई की आशंका तेज

वॉशिंगटन/तेल अवीव। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की आशंका के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई है। इसके बाद ट्रम्प के बयान और अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों ने क्षेत्र में संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं।

ट्रम्प ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े एक-दो ठिकाने अभी निशाने पर हैं। वहीं, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका 4 नवंबर से ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू कर सकता है। हालांकि, इस संबंध में अमेरिकी सरकार की ओर से किसी आधिकारिक सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है।

पश्चिम एशिया में बढ़ाई जा रही सैन्य तैयारियां

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने पिछले कुछ सप्ताह में पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। क्षेत्र में हवाई सुरक्षा प्रणाली, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरणों की तैनाती की जा रही है। इसके साथ ही अमेरिकी सैनिकों और सैन्य संसाधनों को संभावित ईरानी हमलों की पहुंच से दूर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।

इजराइली मीडिया के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिका के 10 सैन्य मालवाहक विमान इजराइल पहुंचे थे। इन विमानों के जरिए हवाई हमलों से बचाव करने वाले उपकरण और सैन्य सामग्री पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनका इस्तेमाल अमेरिकी और सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए किया जा सकता है।

अमेरिकी चुनाव के बाद हमले की चर्चा

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा सहित संसद के लिए प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि चुनावों को देखते हुए ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की समयसीमा आगे बढ़ाई जा सकती है।

ईरान के साथ तनाव और अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतें सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में चुनाव से पहले ट्रम्प प्रशासन किसी बड़े सैन्य टकराव से बचने की कोशिश कर सकता है।

अमेरिका ने बातचीत का रास्ता खुला रखा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प फिलहाल बातचीत के जरिए ईरान के साथ विवाद सुलझाना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।

रूबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अपनी मांगें मनवाने के लिए समुद्री जहाजों और पड़ोसी देशों के तेल एवं गैस ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियां दे रहा है।

ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

दूसरी ओर, ईरान ने भी किसी नए अमेरिकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की चेतावनी दी है। ईरानी नेतृत्व ने सैन्य कमांडरों को संभावित हमले की स्थिति में तत्काल जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा है।

ईरान के सेना प्रमुख जनरल अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी है कि उनके देश ने संभावित निशानों की सूची बढ़ा दी है। यदि अमेरिका की ओर से दोबारा हमला किया गया तो ईरान बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है।

अमेरिका के सामने ईरान ने रखीं तीन प्रमुख शर्तें

अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान ने आर्थिक और वित्तीय राहत से जुड़ी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।

  1. तेल निर्यात पर छूट: ईरान चाहता है कि उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले की तरह तेल बेचने की अनुमति मिले।
  2. आर्थिक प्रतिबंधों से राहत: ईरान पर लगाए गए अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
  3. 6 अरब डॉलर की रकम वापस मिले: ईरान कतर में रोकी गई अपनी करीब 6 अरब डॉलर की धनराशि वापस चाहता है।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन दोनों देशों की ओर से लगातार आ रही सैन्य चेतावनियों ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या क्षेत्र एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है।

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