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‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत’: CJP बोली- अब शिक्षा सुधार और जवाबदेही की अगली लड़ाई

नई दिल्ली।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे अपने आंदोलन की पहली बड़ी सफलता बताया है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, सरकारी जवाबदेही और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

दैनिक भास्कर से बातचीत में CJP के प्रवक्ता आशुतोष राकां ने कहा कि पिछले डेढ़ महीने में संगठन ने लोगों का भरोसा जीता है और बड़ी संख्या में युवाओं को अपने मुद्दों के लिए एक मंच मिला है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल “पहली सीढ़ी” है और अब शिक्षा व्यवस्था में सुधार सहित कई अन्य मुद्दों पर काम किया जाएगा।

आशुतोष ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य ऐसा मंच तैयार करना है, जहां युवा बिना किसी डर के अपनी समस्याएं उठा सकें और सरकार से जवाबदेही मांग सकें। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान घायल हुई छात्रा साक्षी के इलाज और कानूनी सहायता का भी भरोसा दिलाया।

वहीं CJP के दूसरे प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आंदोलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि सरकार के साथ बातचीत, कानूनी रणनीति और आंदोलन की जिम्मेदारियां टीम के सदस्य आपस में बांटकर निभाते रहे हैं।

सौरव ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बैठक से पहले सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनके मोबाइल फोन जमा कराए गए थे। बाद में बातचीत के बाद उन्हें वापस कर दिया गया।

अभिजीत दीपके की नेतृत्व क्षमता पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए दोनों प्रवक्ताओं ने कहा कि सीमित समय में हजारों लोगों को संगठित करना और लंबे समय तक आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से चलाना उनकी नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।

इस बीच आंदोलन में शामिल रहीं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की छात्र नेता नेहा ने कहा कि शिक्षा के मुद्दों पर गंभीर बहस और बदलाव की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से छात्र संगठनों ने आंदोलन का समर्थन किया था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह CJP की सदस्य नहीं हैं, बल्कि दोनों संगठनों के बीच मुद्दा आधारित सहयोग रहा है।

CJP नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन समाप्त होने के बावजूद शिक्षा सुधार, युवाओं के अधिकार और सरकारी जवाबदेही को लेकर उनकी मुहिम आगे भी जारी रहेगी।

नोट: यह रिपोर्ट संबंधित पक्षों के साक्षात्कार और उनके दावों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित वक्ताओं के हैं।

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