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खत्म हुआ आठ साल का इंतजार.. अधूरी जानकारी से Google Map ने खोज निकाला घर, लापता बेटी से मिले मां-बाप

गढ़वा। आठ साल पहले ईंट भट्ठे से रास्ता भटककर अपने परिवार से बिछड़ी नौ साल की मासूम आखिरकार अपने माता-पिता की गोद में लौट आई। उम्मीद लगभग टूट चुकी थी, लेकिन गूगल मैप और बिहार की बाल कल्याण समिति की सतर्कता ने उस बिछड़े रिश्ते को फिर से जोड़ दिया। वीडियो कॉल पर जैसे ही पिता और बेटी ने एक-दूसरे को देखा, दोनों ने तुरंत पहचान लिया। मंगलवार को गढ़वा बाल कल्याण समिति कार्यालय में आठ वर्षों के इंतजार का दर्द खुशी के आंसुओं में बदल गया, जब 17 वर्षीय पैरा कुमारी को सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उसके स्वजन को सौंप दिया गया। दरअसल, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) गढ़वा के कार्यालय में मंगलवार को भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। रंका थाना क्षेत्र के तमगे कला पंचायत स्थित जासोबार गांव निवासी जयराम भुइयां की पुत्री पैरा कुमारी आठ वर्ष बाद अपने स्वजन से मिल गई। जब वह गुम हुई थी, तब उसकी उम्र मात्र नौ वर्ष थी, जबकि अब वह 17 वर्ष की हो चुकी है।

जानकारी के अनुसार, बिहार के कैमूर जिले की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने बच्ची द्वारा बताई गई अधूरी जानकारी के आधार पर गूगल मैप से जासोबार गांव की पहचान की। इसके बाद गढ़वा सीडब्ल्यूसी को सूचना दी गई। गढ़वा की टीम गांव पहुंची और ग्रामीणों से पूछताछ की। जांच के दौरान जयराम भुइयां ने आठ वर्ष पहले अपनी पुत्री के गुम होने की जानकारी दी। इसके बाद वीडियो काल के माध्यम से पिता और पुत्री को आमने-सामने कराया गया, जहां दोनों ने एक-दूसरे को तुरंत पहचान लिया। सभी आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मंगलवार को पैरा कुमारी को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया।

ईंट भट्ठे से मामा के पास जाने के दौरान भटक गई थी बच्ची

जासोबार गांव के अधिकांश लोग ईंट भट्ठों पर मजदूरी करते हैं। आठ वर्ष पहले जयराम भुइयां अपने परिवार के साथ बिहार के डेहरी-आन-सोन क्षेत्र में ईंट पथाई का काम करने गए थे। वहीं पास के दूसरे ईंट भट्ठे पर बच्ची के मामा भी काम करते थे। पैरा कुमारी बिना बताए मामा से मिलने चली गई, लेकिन लौटते समय रास्ता भटक गई और अपने परिवार से बिछड़ गई।

गलत जानकारी के कारण नहीं मिल पा रहा था घर का पता

बच्ची को बाद में बिहार के नवादा और फिर भभुआ स्थित बालिका आश्रय गृह में रखा गया। पिछले छह वर्षों से उसके स्वजन की तलाश की जा रही थी, लेकिन वह अपने गांव का नाम जासोबार और थाना का नाम रंका की जगह केरवा बता रही थी। इसी कारण उसका सही पता नहीं चल पा रहा था। आखिरकार गूगल मैप और बाल कल्याण समिति के प्रयास से उसके गांव की पहचान हुई और आठ वर्षों बाद उसका अपने स्वजन से मिलन संभव हो सका। मंगलवार को बाल कल्याण समिति गढ़वा के सदस्य मुकेश सिंह, राजीव रंजन तिवारी, रेणु कुमारी तथा काउंसलर रिंकी देवी की मौजूदगी में सभी औपचारिकताएं पूरी कर पैरा कुमारी को उसके स्वजन को सौंप दिया गया।

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