गुजरात के महीसागर जिले के लूनवाड़ा में बच्चों में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के लक्षण सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। एक ही स्कूल में पांच से अधिक बच्चों में संदिग्ध लक्षण मिलने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे क्षेत्र में बड़े स्तर पर जांच और निगरानी अभियान शुरू कर दिया है। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य टीमें लगातार स्कूलों और घरों में पहुंचकर सर्वे कर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, लूनवाड़ा नगरपालिका क्षेत्र के 24 स्कूलों में अब तक 13,106 बच्चों की स्वास्थ्य जांच पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही 415 घरों में डोर-टू-डोर सर्वे किया गया है ताकि किसी भी संभावित मामले को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सके। इसके अलावा, पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता जांचने के लिए सात पानी के नमूने भी लैब में भेजे गए हैं, जिससे संक्रमण के संभावित कारणों का पता लगाया जा सके।
GBS एक गंभीर लेकिन दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी मानी जाती है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से नसों पर हमला कर देती है। इसके शुरुआती लक्षणों में पैरों और हाथों में कमजोरी, सुन्नपन, झुनझुनी और चलने-फिरने में कठिनाई शामिल हो सकती है। गंभीर मामलों में यह बीमारी सांस लेने की मांसपेशियों को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे मरीज की हालत नाजुक हो सकती है और उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, GBS का इलाज लंबा और महंगा हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके इलाज में इस्तेमाल होने वाला एक इंजेक्शन लगभग 22 हजार से 42 हजार रुपये तक का हो सकता है। ऐसे में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी माना जाता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी बच्चे या व्यक्ति में GBS जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सके।
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