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SRMS मेडिकल कॉलेज के चार डॉक्टरों पर FIR दर्ज, रैगिंग से परेशान छात्र ने तीसरी मंजिल से लगाई छलांग

-एमडी छात्र बोला- 40-40 घंटे कराई ड्यूटी, गाली, धमकी और मानसिक प्रताड़ना से टूट गया था हौसला

बरेली। डॉक्टर बनने का सपना लेकर मेडिकल कॉलेज(SRMS) पहुंचे एक छात्र की जिंदगी उस वक्त पटरी से उतर गई, जब उसने कथित रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। श्रीराम मूर्ति मेडिकल कॉलेज (एसआरएमएस) के एमडी मेडिसिन प्रथम वर्ष के छात्र आशु पाराशर मामले में अब भोजीपुरा थाने में एफआईआर दर्ज हो गई है। एफआईआर में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें मानसिक उत्पीड़न, अमानवीय व्यवहार, धमकी, जबरन ड्यूटी और रैगिंग शामिल हैं। पीड़ित छात्र के पिता सुधीर पाराशर की तहरीर पर दर्ज मुकदमे ने मेडिकल शिक्षा संस्थानों में रैगिंग के खिलाफ बने नियमों और उनकी हकीकत पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

डॉक्टर बनना था, लेकिन रोज अपमान सहना पड़ा: एफआईआर के मुताबिक बिजनौर निवासी आशु पाराशर ने एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में एमडी मेडिसिन प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। आरोप है कि दाखिले के कुछ दिन बाद ही द्वितीय और तृतीय वर्ष के कुछ सीनियर छात्र उसे निशाना बनाने लगे। तहरीर में कहा गया है कि ड्यूटी के दौरान उसके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता था। छोटी-छोटी बातों पर अपमानित किया जाता था। भोजन करने से रोका जाता था और ड्यूटी खत्म होने के बाद भी घंटों तक रोककर निजी काम कराए जाते थे।

देर रात मैसेज, छुट्टी वाले दिन भी ड्यूटी: एफआईआर में दर्ज आरोपों के अनुसार सीनियर छात्र देर रात मैसेज भेजकर बुलाते थे। रविवार और अवकाश के दिन भी जबरन ड्यूटी पर बुलाया जाता था। छात्र के पैरों में घाव होने के बावजूद उसे जूते बदलने की अनुमति नहीं दी गई। परिवार का आरोप है कि आशु से लगातार सुबह सात बजे से रात 11:30 बजे तक काम कराया जाता था। कई बार 40-40 घंटे तक बिना आराम ड्यूटी करनी पड़ती थी। नींद तक पूरी नहीं करने दी जाती थी।

शिकायत की, लेकिन नहीं मिला समाधान: एफआईआर के अनुसार छात्र ने अपनी परेशानी मेडिसिन विभाग की एचओडी डॉ. स्मिता गुप्ता को बताई थी। वहां से उसे दूसरे डॉक्टर के पास भेज दिया गया, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों का आरोप है कि लगातार बढ़ते मानसिक दबाव और कथित रैगिंग की वजह से छात्र अवसाद में चला गया।

तीसरी मंजिल से कूद गया छात्र: तहरीर में कहा गया है कि 2 मई 2026 को सुबह करीब 11:15 से 11:30 बजे के बीच आशु पाराशर ने मेडिकल कॉलेज की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। घटना में उसे गंभीर और जानलेवा चोटें आईं। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक आईसीयू में इलाज चला। परिवार का कहना है कि छात्र के स्वस्थ होने पर उसने पूरी आपबीती बताई, जिसके बाद पुलिस में शिकायत की गई।

इन लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर: एफआईआर में डॉ. रितेश गोयल (जेआर-3), डॉ. कुशाग्र शर्मा, डॉ. मानस खंडेलवाल, डॉ. लतिका (जेआर-2), कुछ अन्य छात्रों और एसआरएमएस कॉलेज प्रशासन को नामजद किया गया है। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद भी कॉलेज प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। पांच मई को प्रबंधन और प्राचार्य को रजिस्ट्री भेजी गई, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।

कई धाराओं में मुकदमा: भोजीपुरा थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब यह जांच का विषय होगा कि लगाए गए आरोप कितने सही साबित होते हैं और कॉलेज प्रशासन की भूमिका क्या रही। मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। सभी पक्षों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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