NEET पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सरकार ने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों से किए गए अपने वादे पर पूरी तरह कायम है और इस संबंध में किसी भी तरह की गलतफहमी नहीं रहनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सरकार संवेदनशील है और कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित कदम उठाए जाएंगे। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है तो उसे किसी भी हाल में संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र आंदोलन की आड़ में किसी असामाजिक तत्व को भी बचाया नहीं जाना चाहिए।
यह मामला 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की थी। पुलिस कार्रवाई के बाद कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं, जिनमें लाठीचार्ज और अत्यधिक बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने पर विचार किया जा सकता है। साथ ही अदालत ने संबंधित राज्यों को CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं।
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