संवाददाता
सैयद समीर हुसैन
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नवी मुंबई के नेरुल स्थित शिरवणे गांव से सामने आया नव शक्ति दवाखाने का मामला अब एक बार फिर चर्चा में है।
कुछ दिन पहले हमारी न्यूज़ रिपोर्ट के जरिए एक स्टिंग ऑपरेशन के साथ डॉक्टर कमाल हुसैन उर्फ गोरे का खुलासा किया गया था। इस स्टिंग में कमाल हुसैन उर्फ गोरे कथित तौर पर बिना आवश्यक चिकित्सा डिग्री और वैध रजिस्ट्रेशन के मरीजों को देखने और दवाइयां देने की गतिविधियों में नज़र आए थे।
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान करीब 6 हज़ार रुपये की दवाइयों से जुड़ी बातचीत भी कैमरे में रिकॉर्ड होने का दावा किया गया था। हमारी खबर प्रकाशित होने के बाद नव शक्ति दवाखाना बंद हो गया था।
लेकिन अब इस पूरे मामले में एक नया और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।
क्या फिर शुरू होने वाला है नव शक्ति दवाखाना?,
कमाल हुसैन उर्फ गोरे के इंस्टाग्राम अकाउंट पर लगाई गई एक स्टोरी सामने आई है। इस स्टोरी में पुराने ऑरेंज रंग के स्टीकर पर नंबर बदला हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि नए स्टीकर पर एक अलग नंबर नज़र आ रहा है। अब सवाल उठता है क्या नव शक्ति दवाखाने को दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है?
क्या सिर्फ नंबर बदलकर वही गतिविधियां फिर से शुरू करने की कोशिश हो रही है?
जिले के सीएमओ क्या कर रहे है,क्या स्वस्थ विभाग ऐसे लोगों से वंचित है, और अगर ऐसा है, तो स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी?
इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभागों की जांच से ही सामने आना चाहिए। इस मामले में हमारे सूत्रों के हवाले से मुंबई के सवारी इलाके से जुड़ी एक और जानकारी सामने आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, कमाल हुसैन उर्फ गोरे का संबंध सेवाड़ी इलाके के एक दवाखाने से भी रहा है और वहां से उनके कथित तौर पर चले जाने या फरार होने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, इस जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी संबंधित पुलिस रिकॉर्ड या जांच से नहीं हुई है।
इसलिए अब सवाल यह है क्या पुलिस सेवाड़ी से जुड़े पुराने रिकॉर्ड की भी जांच करेगी?,क्या वहां कमाल हुसैन उर्फ गोरे के खिलाफ कोई शिकायत, मामला या कार्रवाई दर्ज हुई थी?
अगर हुई थी, तो उसका रिकॉर्ड क्या कहता है?,और अगर कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था, तो सामने आ रही इस जानकारी की सच्चाई क्या है?,रिपोर्ट के बाद पत्रकार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां कमाल हुसैन उर्फ गोरे के संबंधी द्वारा की गई थी, अब बात उस घटनाक्रम की, जो हमारी खबर प्रकाशित होने के बाद सामने आई।
रिज़वान शेख ने बताया के हमारी रिपोर्ट के कमेंट बॉक्स में एक सोशल मीडिया आईडी से हमारे चैनल AEM TV न्यूज़ और हमारे रिपोर्टर रिज़वान शेख के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने की जानकारी सामने आई। हमने इस आईडी के संबंध में जानकारी जुटाई। हमारे सामने आई जानकारी के अनुसार यह आईडी खुशहाल हुसैन नाम के व्यक्ति द्वारा संचालित बताई जा रही है, जिसे कमाल हुसैन उर्फ गोरे का बेटा बताया जा रहा है। इसके अलावा हमारे व्यक्तिगत इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी अलग-अलग आईडी से कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन सभी दावों की वास्तविकता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि पुलिस या साइबर जांच के जरिए होना जरूरी है।
अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने पत्रकार को जानबूझकर धमकाने, अपमानित करने या सोशल मीडिया के माध्यम से परेशान करने का प्रयास किया है, तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। पत्रकार सवाल पूछेगा।
पत्रकार खबर दिखाएगा।
और किसी भी पत्रकार को डराने या दबाने की कोशिश की जांच कानून के मुताबिक होनी चाहिए। इस मामले में साइबर क्राइम में शिकायत करने की प्रक्रिया शुरू करने और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की जाएगी। दूसरे डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन का भी सवाल उठ रहा है,इस पूरे मामले में हमारे सूत्रों के हवाले से एक और गंभीर जानकारी सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि कमाल हुसैन उर्फ गोरे कथित तौर पर किसी अन्य डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन या योग्यता के सहारे मरीजों को देखने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन यहां भी बड़ा सवाल यही है—
क्या ऐसा करना कानूनन वैध है?
क्या कोई ऐसा व्यक्ति, जिसके पास स्वयं आवश्यक चिकित्सा योग्यता और वैध रजिस्ट्रेशन नहीं है, किसी दूसरे डॉक्टर की डिग्री या रजिस्ट्रेशन के आधार पर मरीजों का इलाज कर सकता है?,क्या वो प्रैक्टिस कर सकता है या नहीं?,
अगर ऐसा करना नियमों के खिलाफ है, तो स्वास्थ्य विभाग इसकी जांच कब करेगा? और सबसे बड़ा सवाल—
क्या किसी मरीज़ की जिंदगी और स्वास्थ्य के साथ कोई गंभीर हादसा होने का इंतजार किया जा रहा है? हमारी मांग है ऐसे लोगों पर कड़ी कारवाही की जाए।
हम किसी व्यक्ति को अदालत के फैसले से पहले दोषी घोषित नहीं कर रहे हैं।
हमारी मांग केवल निष्पक्ष, स्वतंत्र और तत्काल जांच की है।
जांच में इन बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए—
नव शक्ति दवाखाना की गतिविधियों की जांच हो। कमाल हुसैन उर्फ गोरे की शैक्षणिक योग्यता और चिकित्सा रजिस्ट्रेशन की जांच हो। यह स्पष्ट किया जाए कि उन्हें मरीजों को देखने और दवाइयां देने या प्रैक्टिस करने का कानूनी अधिकार है या नहीं। किसी दूसरे डॉक्टर की डिग्री या रजिस्ट्रेशन के कथित इस्तेमाल की जांच हो। सेवड़ी से जुड़े दवाखाने और पुराने पुलिस रिकॉर्ड की जांच की जाए।
सोशल मीडिया पर पत्रकारों के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक या धमकी भरी टिप्पणियों की साइबर जांच हो।
जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए। क्योंकि सवाल सिर्फ कमाल हुसैन उर्फ गोरे का नहीं है।
सवाल सिर्फ नव शक्ति दवाखाने का भी नहीं है। सवाल उन मरीजों की सुरक्षा का है, जो किसी व्यक्ति को डॉक्टर समझकर उसके पास इलाज कराने पहुंच सकते हैं। हमारी खबर सामने आने के बाद नव शक्ति दवाखाना बंद क्यों हुआ था?। लेकिन अब सोशल मीडिया पर सामने आई स्टोरी ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या नव शक्ति दवाखाना दोबारा शुरू करने की तैयारी हो रही है? अगर हां, तो किस अनुमति के आधार पर?
किस रजिस्ट्रेशन के आधार पर?
और मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?
अब इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की जांच से सामने आना चाहिए।
हम किसी को दोषी घोषित नहीं कर रहे है। हम सिर्फ सवाल उठा रहे हैं।
जांच होनी चाहिए।
सच्चाई सामने आनी चाहिए। और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
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