लखनऊ, 14 अगस्त। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देश के विभाजन, सांप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक स्वार्थ को लेकर सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 1947 में सत्ता हासिल करने की जल्दबाजी ने देश को भारी त्रासदी दी और लाखों लोगों को विस्थापन तथा हिंसा का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उससे सीख लेने के लिए याद किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों की प्राथमिकता पहले भी सत्ता हासिल करना थी, वे आज भी उसी राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं। योगी ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों पर वोटबैंक की राजनीति के कारण चुप रहने का आरोप भी लगाया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के गुलाम होने के पीछे आपसी मतभेद, जाति और क्षेत्र के आधार पर बंटवारा तथा लगातार किए गए षड्यंत्र बड़ी वजह रहे। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और इतिहास की गलतियों से सबक लेने की अपील की।
योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हुए प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कुछ राजनीतिक दलों ने विरोध प्रदर्शनों को समर्थन दिया और प्रदेश में अशांति फैलाने की कोशिश की।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने लखनऊ के हजरतगंज स्थित सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और मौन पदयात्रा में हिस्सा लिया। यह पदयात्रा सरदार पटेल प्रतिमा से लोकभवन तक निकाली गई। मुख्यमंत्री ने मास्क लगाकर पैदल यात्रा की और लोकभवन पहुंचकर विभाजन की त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी तथा लघु फिल्म देखी।
कार्यक्रम में विभाजन के दौरान विस्थापित हुए परिवारों के सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इतिहास से सीख सकें और देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत बनाए रखने के लिए सजग रहें।
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