लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को इस मामले की जांच पूरी कर 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपने का निर्देश दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद रिपोर्ट अभी तक औपचारिक रूप से सरकार को नहीं सौंपी गई है। हालांकि उच्च स्तरीय आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। संभावना जताई जा रही है कि अगले एक-दो दिनों अथवा इसी सप्ताह के भीतर एसआईटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप देगी।
देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित अनियमितता या चोरी की खबर सामने आने के बाद यह मामला अत्यंत संवेदनशील बन गया था। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष जांच दल का गठन किया था, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यपरक जांच कराई जा सके तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या वित्तीय अनियमितता के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जा सके।
सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने जांच के दौरान मंदिर परिसर में चढ़ावे के संग्रह, उसकी गिनती, अभिलेखों के रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी फुटेज, संबंधित कर्मचारियों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया है। जांच दल ने यह भी पड़ताल की कि चढ़ावे की सुरक्षा और लेखा-जोखा बनाए रखने के लिए निर्धारित मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं तथा किसी स्तर पर प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी चूक हुई या नहीं।
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य जुड़े व्यक्तियों से पूछताछ की गई। साथ ही विभिन्न दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का मिलान कर घटनाक्रम की क्रमवार समीक्षा की गई। एसआईटी इस निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास कर रही है कि यदि किसी प्रकार की चोरी या अनियमितता हुई है तो उसकी वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, उसके लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए किन सुधारात्मक उपायों की आवश्यकता होगी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने शुरू से ही स्पष्ट किया था कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसी कारण एसआईटी को सभी पहलुओं की गहन जांच करने और तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। जांच के दौरान तकनीकी एवं वित्तीय पहलुओं की भी समीक्षा की गई ताकि रिपोर्ट व्यापक और प्रमाण आधारित हो।
सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में केवल कथित चोरी की परिस्थितियों का उल्लेख ही नहीं होगा, बल्कि मंदिर में चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा, लेखांकन और निगरानी प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए भी कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए जा सकते हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी कमी या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए नई व्यवस्थाएं लागू किए जाने की भी संभावना है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं और मंदिर में नकद दान, आभूषण तथा अन्य प्रकार के चढ़ावे अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की सुरक्षा, उसका पारदर्शी प्रबंधन और व्यवस्थित लेखा-जोखा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता की खबर स्वाभाविक रूप से व्यापक जनचर्चा का विषय बन जाती है, इसलिए सरकार भी इस मामले में अत्यधिक सतर्कता बरत रही है।
वित्तीय और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक संस्थानों में आधुनिक निगरानी प्रणाली, डिजिटल रिकॉर्डिंग, बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, नियमित ऑडिट तथा स्वतंत्र निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं पारदर्शिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि एसआईटी अपनी रिपोर्ट में ऐसे सुझाव देती है, तो भविष्य में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी इस रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध या दोषपूर्ण पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं यदि सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक प्रक्रिया में कमियां सामने आती हैं, तो उन्हें दूर करने के लिए नई कार्ययोजना तैयार की जा सकती है।
अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट लगभग तैयार है और अंतिम स्तर पर तथ्यों के सत्यापन तथा दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इसके बाद रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार उसका परीक्षण करेगी और उसमें की गई सिफारिशों तथा निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल पूरे मामले पर शासन, प्रशासन और श्रद्धालुओं की नजरें टिकी हुई हैं। सभी को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है, क्योंकि उसी के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित चढ़ावा चोरी की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, जांच में किन तथ्यों की पुष्टि हुई और भविष्य में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन तथा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे।
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