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लखनऊ में अकेली लड़कियां बनीं शिकार, 15 की तस्करी! CM सुरक्षा में तैनात PSO की बेटी तक हुई गायब, ऐसे बेनकाब हुए सौदागर

 

लखनऊ में कृष्णानगर पुलिस ने मानव तस्करी के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने मानव तस्करी से जुड़े दो आरोपियों मध्य प्रदेश के सहडोल निवासी संतोष साहू और राजस्थान के साकेतनगर निवासी मनीष भंडारी को गिरफ्तार किया है. इनका गिरोह पिछले 12 साल से लड़कियों को शादी और अनैतिक कार्यों के लिए बेचने का गोरखधंधा चला रहा था. पुलिस ने इनके कब्जे से दो किशोरियों को बरामद किया है, जिनमें से एक रायबरेली की रहने वाली है. डीसीपी दक्षिण निपुण अग्रवाल के अनुसार, गिरोह अकेली और भटकी हुई किशोरियों को निशाना बनाता था. ये लोग चारबाग रेलवे स्टेशन और आलमबाग बस स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में अकेली लड़कियों पर नजर रखते थे. संतोष साहू, जो इस गिरोह का सरगना है, पुलिस की खबर लगते ही वो मोबाइल बदल लेता था.

पूछताछ में कबूल किया कि उसने 12 साल में 15 से ज्यादा लड़कियों को बेचा. एक लड़की को शादी या अनैतिक कार्यों के लिए 50 हजार से लेकर 2.75 लाख रुपये तक में बेचा जाता था. मामले का खुलासा तब हुआ, जब कृष्णानगर में रहने वाले एक सीएम सुरक्षा में तैनात निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) की 16 वर्षीय बेटी 28 जून को घर से गायब हो गई. उसने अपने पिता को वॉइस मेसेज भेजा था, जिसमें कहा, पापा, मुझे मत खोजना, मैं भगवान के पास जा रही हूं. किशोरी घर से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति भी साथ ले गई थी. उसकी गुमशुदगी की शिकायत 30 जून को कृष्णानगर थाने में दर्ज हुई. छानबीन में पता चला कि किशोरी मथुरा में प्रेमानंद जी महाराज से मिलने की इच्छुक थी. संतोष ने उसकी धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर उसे झांसे में लिया और चारबाग रेलवे स्टेशन पर बुलाया. इसके बाद वह उसे मथुरा ले जाने के बहाने कानपुर और फिर प्रयागराज अपने घर ले गया. वहां से किशोरी को मनीष भंडारी को 50 हजार रुपये में बेच दिया गया.

हालांकि, किशोरी के रोने और पकड़े जाने के डर से मनीष ने उसे रखने से मना कर दिया और 45 हजार रुपये वापस लेकर किशोरी को संतोष को सौंप दिया. पुलिस ने छह टीमें गठित कर किशोरी की तलाश शुरू की. 8 जुलाई को उसे बरामद कर लिया गया. पूछताछ में किशोरी ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसके आधार पर गुरुवार को संतोष और मनीष को गिरफ्तार किया गया. संतोष के पास से रायबरेली की एक अन्य किशोरी भी बरामद हुई, जिसके परिजनों को सूचित कर दिया गया है. पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और राजस्थान में फैला हुआ है. सबसे ज्यादा लड़कियां राजस्थान में बेची गईं, जहां हाल ही में एक किशोरी को 2.75 लाख रुपये में सीकर में बेचा गया था. संतोष ने बताया कि वह उन लोगों को टारगेट करता था, जो शादी के लिए लड़कियां खरीदना चाहते थे और इसके लिए लाखों रुपये देने को तैयार थे. संतोष पर लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, छत्तीसगढ़ और प्रतापगढ़ में छह एफआईआर दर्ज हैं, जबकि मनीष पर दो केस दर्ज हैं. संतोष केवल तीसरी कक्षा तक पढ़ा है, जबकि मनीष ने आठवीं तक पढ़ाई की है और वह ट्रेवेल्स में गाड़ी भी चलाता था. दोनों आरोपी पहले छत्तीसगढ़ की जेल में बंद रह चुके हैं. संतोष पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था.

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