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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पर्याप्त नहीं, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार जरूरी: मिस्बाहुल हक

लखनऊ। अखिल भारतीय अकुशल कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (KKC) के प्रदेश कोऑर्डिनेटर मिस्बाहुल हक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी भी मंत्री की जवाबदेही केवल पद पर बने रहने से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को बनाए रखने से तय होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे थे, इसलिए नैतिक आधार पर धर्मेंद्र प्रधान को आंदोलन शुरू होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य को लेकर व्यापक जनाक्रोश सामने आता है, तो नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा है। उनका कहना था कि युवाओं के लंबे संघर्ष ने जवाबदेही के इस प्रश्न को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।
मिस्बाहुल हक ने कहा कि इस पूरे आंदोलन में बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की रही, जो आर्थिक रूप से कमजोर और असंगठित कामगार परिवारों से आते हैं। जिन परिवारों के पास स्थायी रोजगार या आय का भरोसा नहीं होता, उनके लिए प्रतियोगी परीक्षाएं केवल नौकरी प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की सबसे बड़ी उम्मीद होती हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठने वाला हर सवाल सीधे लाखों परिवारों के भविष्य को प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद के भीतर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और सड़क पर संघर्ष कर रहे युवाओं के समर्थन में भी अपनी आवाज बुलंद की। लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की आवाज को संस्थागत मंचों तक पहुंचाएं और उसके समाधान का प्रयास करें।
मिस्बाहुल हक ने कहा कि अब आवश्यकता केवल किसी व्यक्ति के पद छोड़ने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा संस्थागत सुधार सुनिश्चित किए जाने चाहिए, ताकि देश के युवाओं का विश्वास पूरी तरह बहाल हो सके।
उन्होंने कहा कि देश का भविष्य उसके युवाओं के हाथ में है और उनकी मेहनत, प्रतिभा तथा सपनों की रक्षा करना सरकार, संस्थाओं और समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना ही युवाओं के प्रति सच्ची जवाबदेही होगी।

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