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शुरू होने से पहले ही धंसा भारतमाला परियोजना का ब्रिज, 10mm सरिए और 4 इंच कॉन्क्रीट से बनी स्लैब; ठेकेदार पर मिट्टी डालकर मामला छिपाने का आरोप।

खंडवा : इंदौर से एदलाबाद तक बन रहे नेशनल हाईवे (भारतमाला परियोजना) पर खरगोन जिले के बासवां गांव के पास खिरकिया नदी पर नवनिर्मित ब्रिज धंस गया। यह ब्रिज करीब दो महीने पहले ही बनकर तैयार हुई थी और अभी इस पर ट्रैफिक भी शुरू नहीं हुआ है। ब्रिज की स्लैब धंसने से निर्माण की गुणवत्ता और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हादसे के बाद ठेकेदार ने खामियां छिपाने के लिए धंसी हुई जगह पर बारदान बिछाकर मिट्टी डाल दी है।

ब्रिज कांक्रीट गिरने से स्लैब बाहर आ गई है और वहां एक बड़ा गड्‌ढा हो गया है। मौके पर उजागर हुई स्लैब की गुणवत्ता देखकर ग्रामीण और राहगीर हैरान हैं। ब्रिज की स्लैब बनाने में महज 10 एमएम (10 MM) मोटाई के सरिये का इस्तेमाल किया गया है, वह भी सिर्फ दो लेयर में। इसके अलावा कांक्रीट की मोटाई भी सिर्फ 4 इंच तक ही सीमित है। जानकारों के मुताबिक, इससे बेहतर और मजबूत स्लैब डिजाइन तो एक सामान्य घर की छत बनाने में उपयोग की जाती है। यदि हाईवे चालू हो जाता और कोई भारी वाहन यहां से गुजरता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।

203 किलोमीटर के निर्माण की कुल लागत 3900 करोड़ रुपए हैं।

203 किलोमीटर के निर्माण की कुल लागत 3900 करोड़ रुपए हैं।

कंक्रीट की मोटाई सिर्फ 4 इंच है।

कंक्रीट की मोटाई सिर्फ 4 इंच है।

खामियां छिपाने के लिए धंसी हुई जगह पर बारदान बिछाकर मिट्टी डाल दी है।

खामियां छिपाने के लिए धंसी हुई जगह पर बारदान बिछाकर मिट्टी डाल दी है।

ब्रिज की स्लैब बनाने में महज 10 एमएम (10 MM) मोटाई के सरिये का इस्तेमाल किया गया है।

ब्रिज की स्लैब बनाने में महज 10 एमएम (10 MM) मोटाई के सरिये का इस्तेमाल किया गया है।

लागत 3900 करोड़ रुपए, 203 किलोमीटर के निर्माण की कुल लागत 3900 करोड़ रुपए हैं। वहीं ब्रिज धंसने वाले धनगांव से बलवाड़ा प्रोजेक्ट के 40 किलोमीटर हाईवे की लागत 1001.69 करोड़ रुपए हैं। इसमें 12.75 किलोमीटर लंबा नर्मदा नदी पर बनने वाला ब्रिज भी शामिल हैं।

खामी छिपाने के लिए डाले बारदान और पत्थर

ब्रिज धंसने के बाद ठेकेदार के कर्मचारियों ने लापरवाही छिपाने की कोशिश की। स्लैब गिरने वाली जगह पर पहले बारदान (बोरियां) बिछाए गए, फिर उसके ऊपर मिट्टी डाल दी गई। इसके आसपास पत्थरों का ढेर लगाकर दोनों छोर पर बैरिकेड लगा दिए गए हैं, ताकि कोई वाहन हादसे का शिकार न हो। मामले की भनक लगते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और वीडियो बनाकर निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को उजागर किया।

नागपुर की पेटी कॉन्ट्रैक्टर कंपनी के पास है ठेका

इंदौर-एदलाबाद नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट कुल 206 किलोमीटर का है। इसमें से खरगोन के बलवाड़ा और खंडवा के धनगांव के बीच 39 किलोमीटर के हिस्से का ठेका जीएचवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GHV India) को मिला है। जीएचवी ने यह काम आगे पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर दे दिया है…

  • नर्मदा नदी पर ब्रिज निर्माण: मंगलम बिल्डकॉन कंपनी।
  • सड़क और अन्य ब्रिज निर्माण: नागपुर की केदारेश्वर कंपनी (केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के संसदीय क्षेत्र की कंपनी)।

खास बात यह है कि यही केदारेश्वर कंपनी मध्य प्रदेश सरकार (PWD) के अधीन ओंकारेश्वर फोरलेन का निर्माण भी कर रही है, जिसकी कनेक्टिविटी इसी इंदौर हाईवे से होनी है।

NHAI यूनिट्स का पल्ला झाड़ना, कंपनी को जानकारी ही नहीं

यह प्रोजेक्ट पहले NHAI की इंदौर यूनिट के पास था। काम में लेटलतीफी के कारण इसी साल धनगांव से बलवाड़ा तक का हिस्सा खंडवा यूनिट को हैंडओवर किया गया है। जिस ब्रिज की छत धंसी है, वह इंदौर यूनिट के कार्यकाल में ही बनी थी। इसलिए अब खंडवा यूनिट के अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

वहीं, पेटी कांट्रैक्टर कंपनी केदारेश्वर और मुख्य निर्माण कंपनी जीएचवी इंडिया के प्रोजेक्ट मैनेजर रुद्रा हजांगे ने इस गंभीर लापरवाही पर अनभिज्ञता जताते हुए कहा, ब्रिज की छत धंसने का मामला मेरे कार्य क्षेत्र में कहीं नहीं हुआ है। अगर ऐसा हुआ भी है, तो यह एक सामान्य मामला होगा और फिलहाल मेरी जानकारी में नहीं है।

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