कानपुर। देशभर में स्वतंत्रता दिवस का जश्न 15 अगस्त को मनाया जाता है, लेकिन कानपुर में आजादी का उत्सव एक रात पहले ही शुरू हो जाता है। ऐतिहासिक मेस्टन रोड स्थित बीच वाला चौक मंदिर पर हर साल 14 अगस्त की रात 12 बजकर 1 मिनट पर तिरंगा फहराया जाता है। आजादी के बाद से चली आ रही यह परंपरा 79 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है।
80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रात 12 बजकर 1 मिनट पर महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पवन गुप्ता ने ध्वजारोहण किया। तिरंगा फहरते ही पूरा क्षेत्र भारत माता के जयकारों, राष्ट्रगान और देशभक्ति गीतों से गूंज उठा। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे और आतिशबाजी से आसमान भी रोशन हो गया।
आजादी की पहली रात की याद में शुरू हुई परंपरा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह आयोजन महज ध्वजारोहण नहीं बल्कि स्वतंत्रता की पहली रात की ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा समारोह है। 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि में स्वतंत्रता की घोषणा के बाद मेस्टन रोड के बीच वाला चौक मंदिर पर तिरंगा फहराकर आजादी का स्वागत किया गया था।
बताया जाता है कि उस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों लोग एकत्र हुए थे। तब से हर साल उसी समय ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को याद किया जाता है।
शिवनारायण टंडन ने फहराया था पहला तिरंगा
इतिहास से जुड़े लोगों के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और तत्कालीन शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शिवनारायण टंडन ने 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि में यहां पहला राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। बाद में वे कानपुर से सांसद भी बने। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में आज भी आधी रात को तिरंगा फहराने की परंपरा जारी है।
समारोह के दौरान नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। कलाकारों ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी, जबकि बच्चों और बुजुर्गों ने हाथों में तिरंगा लेकर आजादी के जश्न में हिस्सा लिया।
स्वतंत्रता आंदोलन का अहम केंद्र रहा मेस्टन रोड
मेस्टन रोड का संबंध कानपुर के स्वतंत्रता आंदोलन से भी गहरा रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में यह क्षेत्र राष्ट्रीय गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था। बीच वाला चौक मंदिर परिसर में स्वतंत्रता सेनानियों की बैठकें भी होती थीं।
इतिहास से जुड़े विवरणों के मुताबिक, 1925 में महात्मा गांधी ने मेस्टन रोड पर खादी भंडार का उद्घाटन किया था। इसी इलाके में स्थित तिलक हॉल भी कांग्रेस की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। इसकी आधारशिला पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी और बाद में महात्मा गांधी ने इसका उद्घाटन किया।
मेस्टन रोड से जुड़ी कई ऐतिहासिक यादें आज भी कानपुर की स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को जीवित रखती हैं। यही वजह है कि 14 अगस्त की आधी रात को यहां होने वाला ध्वजारोहण शहर के लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की पहली रात की ऐतिहासिक स्मृति का प्रतीक बन चुका है।
News Wani
