चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। शी जिनपिंग नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उनके भारत पहुंचने के बाद दोनों देशों के संबंधों और आगामी द्विपक्षीय वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हैं।
शी जिनपिंग की शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इस मुलाकात में भारत-चीन संबंधों, सीमा से जुड़े मुद्दों, व्यापार और दोनों देशों के बीच आगे सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
BRICS सम्मेलन में साथ नजर आएंगे मोदी, जिनपिंग और पुतिन
BRICS सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक मंच पर नजर आएंगे। तीनों नेताओं की ऐसी मुलाकात लंबे अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले 2016 में गोवा में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान तीनों नेता एक साथ दिखाई दिए थे।
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, डिजिटल भुगतान, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन और वैश्विक चुनौतियों समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत-चीन संबंधों में अहम हो सकती है मोदी-जिनपिंग वार्ता
गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच लंबे समय तक सीमा पर तनाव की स्थिति रही। अब दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कई स्तरों पर बातचीत चल रही है। ऐसे में मोदी और जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीमा विवाद के साथ-साथ भारत और चीन के बीच व्यापार भी बड़ा मुद्दा है। दोनों देशों के बीच व्यापार में चीन से होने वाला आयात काफी अधिक है, जिसके कारण भारत का व्यापार घाटा भी बड़ा बना हुआ है।
BRICS में डॉलर के विकल्प पर बढ़ रहा जोर
BRICS देशों के बीच आपसी व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने को लेकर भी चर्चा जारी है। सदस्य देश स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने और डिजिटल भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं।
हालांकि, BRICS की अपनी कोई साझा मुद्रा या एकीकृत भुगतान प्रणाली फिलहाल अस्तित्व में नहीं है। स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कारोबार को आसान बनाना और डॉलर पर निर्भरता को कुछ हद तक कम करना है।
कई विदेशी नेताओं से भी मुलाकात करेंगे PM मोदी
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इनमें इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग शामिल हैं।
मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक भी हुई, जिसमें दोनों देशों के संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की गई।
BRICS सम्मेलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा कड़ी
शी जिनपिंग समेत कई विदेशी नेताओं के भारत पहुंचने के चलते दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया है। सम्मेलन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। सुरक्षा में तैनात वाहनों की भी स्निफर डॉग की मदद से जांच की जा रही है।
भारत के लिए BRICS सम्मेलन क्यों अहम?
BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण समूह है। इसके सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। समूह के विस्तार के बाद इसका वैश्विक प्रभाव भी बढ़ा है।
भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ व्यापार, डिजिटल तकनीक, स्थानीय मुद्रा में लेन-देन और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है।
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