शेनझेन। चीन की दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी एवरग्रैंड आखिरकार दिवालिया घोषित कर दी गई। कभी दुनिया की सबसे मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनियों में शुमार रही इस कंपनी पर करीब 300 अरब डॉलर यानी लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था। कंपनी के संस्थापक हुई का यान को वित्तीय धोखाधड़ी और गंभीर आर्थिक अनियमितताओं के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
एवरग्रैंड का पतन चीन के रियल एस्टेट सेक्टर के सबसे बड़े संकटों में से एक माना जा रहा है। कंपनी ने कर्ज लेकर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी, फ्लैटों की एडवांस बुकिंग से पैसा जुटाया और उसी रकम से नए प्रोजेक्ट शुरू किए। लंबे समय तक यह मॉडल तेजी से बढ़ता रहा, लेकिन कर्ज पर बढ़ती निर्भरता ने आखिरकार कंपनी की वित्तीय स्थिति को कमजोर कर दिया।
कभी चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में थी एवरग्रैंड
एवरग्रैंड ने चीन में तेजी से बढ़ते शहरीकरण का फायदा उठाकर अपना विशाल कारोबार खड़ा किया। कंपनी ने देश के सैकड़ों शहरों में हजारों आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट शुरू किए। 2017-18 के दौरान कंपनी का बाजार मूल्य करीब 400 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
कंपनी ने सिर्फ रियल एस्टेट तक अपना कारोबार सीमित नहीं रखा, बल्कि फुटबॉल क्लब समेत कई दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश किया। कुछ ही वर्षों में एवरग्रैंड चीन के कारोबारी जगत की सबसे चर्चित कंपनियों में शामिल हो गई।
सरकार की सख्ती के बाद बिगड़ा पूरा खेल
एवरग्रैंड के संकट की बड़ी वजह 2020 में चीन सरकार की ‘थ्री रेड लाइन्स’ नीति बनी। इस नीति के जरिए सरकार ने अत्यधिक कर्ज लेने वाली रियल एस्टेट कंपनियों पर लगाम लगाने की कोशिश की।
कर्ज मिलने में मुश्किल बढ़ने के साथ ही एवरग्रैंड का कैश फ्लो प्रभावित होने लगा। दूसरी ओर, चीन के प्रॉपर्टी बाजार में बिक्री कमजोर पड़ने लगी। इससे कंपनी के लिए पुराने कर्ज चुकाना और नए प्रोजेक्ट जारी रखना मुश्किल होता गया।
1,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट अधूरे
एवरग्रैंड के संकट का सबसे बड़ा असर उसके ग्राहकों और घर खरीदारों पर पड़ा। कंपनी के करीब 1,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट 280 शहरों में अधूरे बताए गए। इन प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में ऐसे घर शामिल थे, जिनके लिए खरीदार पहले ही भुगतान कर चुके थे।
चीनी सरकार ने स्थानीय घर खरीदारों के हितों को प्राथमिकता देते हुए अधूरे आवासीय प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने पर जोर दिया।
संस्थापक हुई का यान को उम्रकैद
कंपनी के संस्थापक हुई का यान को वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य गंभीर आर्थिक अनियमितताओं में दोषी ठहराया गया। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ उनके राजनीतिक अधिकारों को खत्म करने और निजी संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दिया।
कंपनी और उससे जुड़ी इकाइयों पर भी भारी जुर्माना लगाया गया है।
शेयर बाजार से भी खत्म हुआ अस्तित्व
एवरग्रैंड के शेयर लंबे समय तक ट्रेडिंग निलंबित रहने के बाद अगस्त 2025 में हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट कर दिए गए थे। इसके बाद कंपनी का सार्वजनिक शेयर बाजार में कारोबार भी खत्म हो गया।
अब अदालत के दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के फैसले के साथ एवरग्रैंड के कारोबारी साम्राज्य का औपचारिक अंत होता दिखाई दे रहा है।
क्या यह चीन का ‘लेहमैन मोमेंट’ है?
एवरग्रैंड संकट की तुलना अमेरिका के 2008 के लेहमैन ब्रदर्स संकट से की गई, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों मामलों में बड़ा अंतर है। लेहमैन ब्रदर्स के पतन का असर वैश्विक बैंकिंग सिस्टम पर पड़ा था, जबकि एवरग्रैंड संकट को चीन सरकार ने लंबे समय तक नियंत्रित तरीके से संभालने की कोशिश की।
इसलिए एवरग्रैंड का दिवालिया होना चीन के लिए गंभीर आर्थिक चुनौती जरूर है, लेकिन इसे सीधे 2008 जैसे वैश्विक वित्तीय संकट के बराबर रखना सही नहीं होगा।
भारत के लिए भी बड़ा सबक
एवरग्रैंड की कहानी बताती है कि अत्यधिक कर्ज पर आधारित विकास मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होता। रियल एस्टेट कंपनियों के लिए मजबूत वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और खरीदारों के पैसे की सुरक्षा बेहद जरूरी है।
भारत में RERA जैसे नियमों, एस्क्रो व्यवस्था और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने की निगरानी को मजबूत बनाए रखना घर खरीदारों के हित में महत्वपूर्ण है।
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