लहरपुर, सीतापुर। लहरपुर तहसील क्षेत्र में कोतवाली के सामने संचालित एक डायग्नोस्टिक सेंटर की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सेंटर पर कथित रूप से फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार किए जाने की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। टीम ने सेंटर के पंजीकरण, जांच संबंधी अभिलेखों और चिकित्सकों की मौजूदगी की पड़ताल करते हुए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज एकत्र किए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेंटर के खिलाफ आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता और सेंटर के संचालन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अधीक्षक अरविंद बाजपेई और नायब तहसीलदार सूरज भारती के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सेंटर का पंजीकरण प्रमाणपत्र, जांच से संबंधित दस्तावेज और ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों की भौतिक उपस्थिति की जानकारी जुटाई। टीम ने आवश्यक अभिलेख एवं जांच संबंधी प्रपत्र अपने कब्जे में लेकर आगे की जांच के लिए एकत्र किए। अधिकारियों के अनुसार, इन दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
बताया जा रहा है कि संबंधित सेंटर के संचालन को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पूर्व में अनियमितताओं के आरोप लगने और सेंटर को सील किए जाने की कार्रवाई की बात भी कही जा रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक अभिलेखों से पुष्टि होना बाकी है।
इसके अलावा सेंटर में अल्ट्रासाउंड जांच योग्य चिकित्सक के स्थान पर तकनीशियन से जांच कराए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सकीय जांच की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला होगा। गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज होने से मरीजों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहती है। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अधीक्षक अरविंद बाजपेई ने बताया कि निरीक्षण के दौरान जरूरी दस्तावेज एकत्र किए गए हैं और मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। शिकायतकर्ता की ओर से संबंधित साक्ष्य अभी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होने पर सेंटर संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संचालक से नहीं मिल सका पक्ष
मामले में सेंटर प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संचालक ने कॉल रिसीव नहीं की। इस कारण खबर प्रकाशित होने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। प्रबंधन की प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
प्रशासनिक टीम के निरीक्षण के बाद क्षेत्र में डायग्नोस्टिक सेंटरों की कार्यप्रणाली और जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और संबंधित सेंटर के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
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