– संस्कार और शौर्य से ही मजबूत होगा समाज: साध्वी
– कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि।
अमौली, फतेहपुर। विकास खंड के कौंह गांव में भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर रविवार को आयोजित भव्य समारोह आस्था, उत्साह और सामाजिक एकजुटता का केंद्र बन गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं, युवाओं और महिलाओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को भगवामय बना दिया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति का ग्रामीणों एवं आयोजकों ने फूल-मालाओं, अंगवस्त्र और जयघोष के साथ जोरदार स्वागत किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व विधायक आदित्य पांडेय ने भगवान परशुराम के आदर्शों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया, वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद विधायक सरोज कुरील समेत कई जनप्रतिनिधि मंचासीन रहे। पूरे आयोजन के दौरान जय श्री परशुराम के उद्घोष से वातावरण गूंजता रहा। भगवान परशुराम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में सुबह बकेवर से विशाल शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ, जो जहानाबाद होते हुए कौंह गांव पहुंची। शोभा यात्रा में सजे-धजे रथ पर भगवान परशुराम की आकर्षक झांकी सजाई गई थी। डीजे, ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और भगवा पताकाओं के बीच सैकड़ों दोपहिया व चार पहिया वाहनों का काफिला शामिल रहा। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभा यात्रा का स्वागत किया। कई स्थानों पर जलपान और शीतल पेय की व्यवस्था की गई। मुख्य अतिथि साध्वी निरंजन ज्योति ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान परशुराम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं बल्कि न्याय, शौर्य, तप, अनुशासन और राष्ट्रधर्म के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को भगवान परशुराम के आदर्शों की सबसे अधिक आवश्यकता है, क्योंकि संस्कारविहीन समाज कभी मजबूत नहीं हो सकता। युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति और सनातन परंपरा से जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। साध्वी ने कहा कि भारत की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक संस्कृति है तथा इसे कमजोर करने वाली ताकतों से सावधान रहने की आवश्यकता है। पूर्व विधायक आदित्य पांडेय ने कहा कि भगवान परशुराम जन्मोत्सव केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का महापर्व है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, युवाओं को प्रेरित करने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराने का काम करते हैं। विधायक सरोज कुरील ने आयोजकों की सराहना की। धार्मिक अनुष्ठान, पूजन-अर्चन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जनसभा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। देर शाम तक श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहा।

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