खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मंगलवार सुबह कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को ड्रोन से निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि कम से कम तीन ड्रोन हमले में शामिल थे, हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसी दौरान ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आ गया। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने घटना की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि उसके पास समझौते का यह “आखिरी मौका” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।
तनाव के बीच सामने आए बड़े घटनाक्रम
- अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता की तारीख और स्थान अभी तय नहीं हो सके हैं। पाकिस्तान और कतर समेत कुछ देशों के मध्यस्थ बनने की चर्चा है।
- रिपोर्टों के मुताबिक ईरान अब सीधे युद्ध के बजाय समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और रणनीतिक शिपिंग मार्गों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
- IRGC ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे एक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया, हालांकि ड्रोन किस देश का था इसकी पुष्टि नहीं की गई।
- अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है।
- यमन के हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद कई सऊदी सुपरटैंकरों ने लाल सागर का रास्ता छोड़कर अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा समुद्री मार्ग अपनाया है, जिससे वैश्विक शिपिंग सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ईरान में आंतरिक हलचल भी तेज
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान में सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच शक्ति संतुलन को लेकर भी तनाव बढ़ रहा है। दावा किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मामलों में अब रिवोल्यूशनरी गार्ड की भूमिका पहले से अधिक प्रभावी हो गई है।
कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। ब्रेंट और WTI क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर तेजी दर्ज की गई, जिससे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
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