फतेहपुर। जिले की ऐतिहासिक धरोहर बावनी इमली अब लौह कला-कृति के रूप में राजधानी लखनऊ में फतेहपुर की पहचान बढ़ा रही है। खजुहा स्थित बावनी इमली के ऐतिहासिक वृक्ष की लोहे से बनी आकर्षक प्रतिकृति को लखनऊ की ओडीओपी (एक जनपद, एक उत्पाद) गैलरी में प्रदर्शित किया गया है। इससे जिले के गौरवशाली इतिहास के साथ यहां के लौह शिल्प और कारीगरों की प्रतिभा को भी नई पहचान मिल रही है।
ओडीओपी आयरन फैब्रिकेशन उत्पाद के अंतर्गत हस्तशिल्पी बृजेश सोनी की ओर से तैयार की गई इस प्रतिकृति को उपायुक्त उद्योग अजय कुमार गुप्ता को सौंपा गया। उपायुक्त उद्योग कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विभागीय अधिकारियों और उद्यमियों ने इस पहल की सराहना की। इस कलाकृति में वृक्ष के तने, शाखाओं और पत्तियों को बारीकी से उकेरा गया है।
बावनी इमली का इतिहास वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार, 28 अप्रैल 1858 को खजुहा स्थित इसी वृक्ष पर 52 स्वतंत्रता सेनानियों को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। यह ऐतिहासिक स्थल आज भी वीर शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है।
लखनऊ की ओडीओपी गैलरी में प्रदर्शित इस प्रतिकृति को देखने आने वाले लोगों को फतेहपुर के इतिहास और यहां के लौह शिल्प की विशेषताओं से परिचित होने का अवसर मिल रहा है। इस पहल से जिले के आयरन फैब्रिकेशन उद्योग को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
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