लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच कई जिलों में बाढ़ के हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। गंगा, यमुना समेत प्रदेश की कई नदियां उफान पर हैं। फर्रुखाबाद और बिजनौर में नदी का पानी सड़कों और हाईवे तक पहुंच गया है, जबकि कई गांवों का संपर्क दूसरे इलाकों से टूट गया है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने घर, भोजन और सुरक्षित ठिकाने का संकट खड़ा हो गया है।
फर्रुखाबाद में गंगा नदी के तेज कटान से अब तक 21 मकान नदी में समा चुके हैं। कटान की चपेट में आए कई परिवार अपने घरों को खुद तोड़ रहे हैं, ताकि बची हुई ईंट, सरिया और अन्य सामान को सुरक्षित रखा जा सके। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और पाई-पाई जोड़कर घर बनाया था, लेकिन बाढ़ ने उनकी पूरी जमा-पूंजी तबाह कर दी।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परिवार सड़कों के किनारे टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं। रात में खुले आसमान के नीचे बच्चों और बुजुर्गों के साथ समय बिताना पड़ रहा है। लोगों के सामने खाने-पीने और रहने की बड़ी समस्या है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
बिजनौर में गंगा का पानी हाईवे के ऊपर से बहने लगा है। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न होने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है। दर्जनों गांवों का संपर्क टूटने की स्थिति में है। प्रशासन और पुलिस की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।
उधर, मथुरा में यमुना का जलस्तर बढ़ने से घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। वृंदावन में केशीघाट का परिक्रमा मार्ग भी पानी में डूब गया है। वाराणसी में गंगा का पानी मणिकर्णिका घाट तक पहुंच गया है और घाटों को जोड़ने वाले कई रास्तों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
कानपुर के आसपास भी गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ब्रह्मावर्त घाट स्थित मंदिर परिसर का एक हिस्सा पानी में डूब गया है। वहीं सहारनपुर में तेज बारिश के बाद गंगराव नदी में अचानक सैलाब आने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया। दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर नदी का पानी बहने लगा और कई सड़कें तथा कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। कई इलाकों में घरों और दुकानों में पानी घुस गया।
मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। दक्षिणी उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मानसून के सक्रिय रहने की संभावना जताई गई है। ललितपुर और महोबा में भारी बारिश की आशंका है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
प्रदेश में इस वर्ष अब तक बारिश सामान्य से कम रही है, लेकिन हाल के दिनों में पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों पर नजर रखी जा रही है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में बढ़ी चिंता
फर्रुखाबाद में घर गंवा चुके परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल सुरक्षित ठिकाने का है। महिलाओं और बच्चों में बाढ़ को लेकर डर बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो उन्हें अपना गांव पूरी तरह छोड़ना पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और बाढ़ के कारण जनजीवन प्रभावित है। प्रशासन ने लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
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