काहिरा/तेल अवीव। 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हुए हमास के बड़े हमले को लेकर नई रिपोर्टों में कई गंभीर दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले से पहले इजराइल को गाजा में बिगड़ते हालात और संभावित बड़े संकट को लेकर चेतावनियां मिली थीं। इनमें मिस्र की ओर से दी गई चेतावनी भी शामिल थी।
बताया गया है कि हमले से करीब 48 घंटे पहले मिस्र ने इजराइल को संभावित खतरे के बारे में आगाह किया था। मिस्र की खुफिया एजेंसी के तत्कालीन प्रमुख अब्बास कामेल ने भी हमले से पहले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय से संपर्क किया था।
जून से ही गाजा के हालात पर चेतावनी
रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र ने जून 2023 में इजराइल को गाजा की स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई थी। मिस्र ने इजराइल और हमास के बीच बंधकों तथा कैदियों की अदला-बदली को लेकर बातचीत दोबारा शुरू करने की सलाह भी दी थी।
सितंबर 2023 में अब्बास कामेल ने इजराइल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने गाजा में बढ़ते तनाव और संभावित बड़े संकट को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार इजराइली अधिकारियों ने उस समय हालात को नियंत्रण में बताया था।
पूर्व रक्षा मंत्री ने भी लगाए आरोप
इजराइल के पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने भी दावा किया कि देश को संभावित हमले को लेकर पहले से जानकारी मिली थी। उनके अनुसार, नेतन्याहू ने हमले से पहले मिली कुछ अहम जानकारियां सुरक्षा अधिकारियों के साथ साझा नहीं की थीं।
गैलेंट ने यह भी आरोप लगाया कि युद्ध के दौरान नेतन्याहू और अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई कुछ संवेदनशील बातचीत की जानकारी उन्हें कई बार बाद में मिली। इन बातचीत में बंधकों और गोला-बारूद जैसे मुद्दे शामिल होने का दावा किया गया।
UAE से मिली चेतावनी का भी दावा
इससे पहले एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया था कि UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सितंबर 2023 में नेतन्याहू को हमास के संभावित बड़े हमले को लेकर चेतावनी दी थी।
रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल के कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा था कि यह जानकारी देश के शीर्ष सुरक्षा तंत्र तक नहीं पहुंची। हालांकि, नेतन्याहू ने UAE से जुड़ी इस चेतावनी के दावे को खारिज करते हुए रिपोर्ट को झूठ बताया था।
7 अक्टूबर 2023 को हुआ था बड़ा हमला
7 अक्टूबर 2023 को हमास के लड़ाकों ने गाजा सीमा पार कर इजराइल के कई समुदायों और सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, हमले में करीब 1,200 लोगों की मौत हुई, लगभग 5,000 लोग घायल हुए और करीब 250 लोगों को बंधक बनाया गया था।
इस पूरे मामले में सामने आए दावे अलग-अलग रिपोर्टों और पूर्व इजराइली अधिकारियों के बयानों पर आधारित हैं। नेतन्याहू की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को स्वीकार किया गया हो, ऐसा इस सामग्री में नहीं बताया गया है।
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