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मोदी का विपक्ष पर निशाना: बोले- देश में नक्सलवाद आखिरी सांसें गिन रहा, हिंसा के दौर में संविधान की बात करने वालों के हाथ कांपते थे

पीएम मोदी ने देश में दशकों से जारी नक्सलवाद हिंसा को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग अब संविधान दिखा रहे हैं, उनके हाथ तब कांप रहे थे, जब नक्सली हिंसा चरम पर थी। रिपब्लिक भारत न्यूज चैनल के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने सोमवार को कहा कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने नक्सल प्रभावित इलाकों को पिछड़ा क्षेत्र करार दिया था। लेकिन NDA सरकार ने उन इलाकों को बदलने की चुनौती स्वीकार की, वहां के लोगों को निराशा से बाहर निकलने में मदद की और उनमें तरक्की की उम्मीदें जगाईं।

पीएम ने आगे कहा कि सरकारें आईं और गईं, पीढ़ियां आईं और गईं और ऐसा लगा कि हिंसा का यह दुर्भाग्य ऐसे ही बना रहेगा। लेकिन हमने स्थिति को बदलने के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ कदम आगे बढ़ाए। आज, देश में माओवादी-नक्सलवाद अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि इसके लिए पूर्ण समर्पण की आवश्यकता थी। दरअसल कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कई बार संविधान की प्रति हाथ में लहाराते देखा गया है। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद सांसद के तौर पर शपथ लेते समय भी उन्होंने यही किया था।

पीएम की स्पीच, 4 बड़ी बातें; कहा- ‘नेशन फर्स्ट’ ही सरकार का मूल मंत्र

  • ‘नेशन फर्स्ट’ ही सरकार का मूल मंत्र: पिछले 12 सालों में केंद्र सरकार के हर फैसले और हर प्रयास के केंद्र में ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना रही है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, खादी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने जैसे कदम इसी सोच का हिस्सा हैं। हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के दौरान दुनिया के नेताओं ने महसूस किया कि आज का भारत ‘नेशन फर्स्ट’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है।
  • मध्यम वर्ग को टैक्स और स्वास्थ्य में राहत मिली: 2013-14 में 2 लाख रुपए से अधिक आय पर टैक्स लगता था, जबकि अब 12 लाख रुपए सालाना तक की आय को कर से छूट दी गई है। जीएसटी सुधारों से टैक्स प्रक्रिया आसान हुई है और लोग घर बैठे आयकर रिटर्न भर सकते हैं। वहीं, जन औषधि केंद्रों के जरिए सस्ती दवाएं मिलने से लोगों की करीब 40 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है।
  • मेट्रो, ट्रेन और एयरपोर्ट का तेजी से विस्तार: 2014 में रोजाना करीब 28 लाख लोग मेट्रो से सफर करते थे, जबकि अब यह संख्या 1.28 करोड़ तक पहुंच गई है। वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनें देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश में एयरपोर्ट की संख्या भी दोगुनी हुई है।
  • पिछड़े क्षेत्रों को बनाया ‘आकांक्षी जिला’: 100 से ज्यादा जिलों और 500 से अधिक ब्लॉकों को पिछड़े क्षेत्र मानकर छोड़ दिया गया था। उनकी सरकार ने इन्हें ‘आकांक्षी जिला’ और ‘आकांक्षी ब्लॉक’ नाम देकर विकास की मुख्यधारा में लाने का काम किया।

    30 मार्च 2026- अमित शाह ने संसद में कहा था- देश में नक्सलवाद खत्म

    30 मार्च को संसद के बजट सत्र के दौरान गृहमंत्री ने लोकसभा में कहा था कि देश से नक्सलवाद खत्म हो गया है।
    30 मार्च को संसद के बजट सत्र के दौरान गृहमंत्री ने लोकसभा में कहा था कि देश से नक्सलवाद खत्म हो गया है।

    इसी साल 30 मार्च को गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि भारत नक्सल-मुक्त हो गया है, ऐसा हम कह सकते हैं। अपनी डेढ़ घंटे स्पीच के दौरान शाह ने कहा था- हमने 31 मार्च तक देश को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। मैं पूरी व्यवस्था होने के बाद देश को भी सूचित करूंगा। शाह ने कहा- जो लोग पूरी व्यवस्था को नकार कर हथियार उठा लेते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। सालों से भोले-भाले आदिवासियों को अंधेरे में रखा गया। वामपंथियों ने अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए आदिवासियों को बहकाया।

    पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव से शुरू हुआ था नक्सलवाद

    भारत में नक्सलवाद (माओवादी आंदोलन) की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव से हुई थी। इसी वजह से इसे नक्सलवाद कहा गया। समय के साथ यह आंदोलन कई राज्यों में फैला और 2000 के दशक में देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में से एक बन गया। 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से शुरू हुआ नक्सल आंदोलन 2000 के दशक में “रेड कॉरिडोर” के रूप में 10 से ज्यादा राज्यों में फैला, लेकिन सुरक्षा अभियानों और विकास योजनाओं के बाद अब इसका दायरा काफी सिमट चुका है।

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