नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को रद्द करने की मांग को लेकर राहुल गांधी लगातार दूसरे दिन भी सड़क पर नजर आए। 6 और 7 अक्टूबर को उन्होंने विपक्षी सांसदों के साथ लगातार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान धरना, मार्च और पुलिस हिरासत के चलते उनका आंदोलन चर्चा में रहा।
6 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। पुलिस द्वारा रास्ता रोके जाने के बाद राहुल और प्रियंका आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। करीब 8 से 9 घंटे चले इस प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया।
जमीन पर बैठकर खाना खाया
आकाशवाणी परिसर में धरने के दौरान राहुल गांधी जमीन पर बैठे नजर आए। उन्होंने पेड़ के नीचे बैठकर खाना भी खाया। इस दौरान वे लगातार विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करते रहे।
विपक्षी सांसदों की मांग थी कि उन्हें चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने का मौका दिया जाए। विपक्ष ने SIR, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए।
अगले दिन फिर जंतर-मंतर के लिए निकले
6 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद भी विपक्ष का आंदोलन नहीं रुका। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के सांसद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए निकले। इससे पहले सांसदों ने बैठक की और लंच के बाद बसों से जंतर-मंतर की ओर रवाना हुए।
जंतर-मंतर पहुंचने से पहले पुलिस ने बसों को रोक दिया। इसके बाद कई विपक्षी सांसद सड़क पर उतरकर विरोध करने लगे। कुछ कांग्रेस सांसद बस की छत पर भी चढ़ गए।
पुलिस ने राहुल गांधी को फिर हिरासत में लिया
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनने के बाद राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। प्रियंका गांधी भी सड़क पर बैठकर विरोध करती नजर आईं।
राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि उनके खिलाफ दर्ज FIR उन्हें डराने वाली नहीं हैं और वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे।
पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा सक्रिय दिखे राहुल
इस आंदोलन के जरिए राहुल गांधी की सक्रिय राजनीतिक भूमिका भी चर्चा में आई है। 2026 में वे SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर कई बड़े विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं।
कांग्रेस इन प्रदर्शनों को केवल मतदाता सूची के मुद्दे तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी SIR को वोट के अधिकार, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस के सामने विपक्ष को साथ रखने की चुनौती
राहुल गांधी के नेतृत्व में आंदोलन को आगे बढ़ाना कांग्रेस के लिए जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही बड़ी चुनौती विपक्षी दलों को एकजुट रखना भी है। INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों के बीच आंदोलन के तरीके और रणनीति को लेकर मतभेद सामने आने की संभावना बनी हुई है।
कांग्रेस की कोशिश है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे को आगे आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया जाए। हालांकि, इस अभियान की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि विपक्ष मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी से जुड़े सत्यापित मामलों को कितनी मजबूती से सामने रख पाता है।
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