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प्रयागराज में दुर्लभ धरोहरों का खजाना, छोटे धार्मिक ग्रंथों से लेकर 105 साल पुराने नारियल तक का संग्रह

 

न्यूज़ वाणी ब्यूरो
प्रयागराज। संगमनगरी प्रयागराज के ऐतिहासिक दारागंज क्षेत्र में राजेंद्र कुमार तिवारी उर्फ दुकानजी द्वारा स्थापित अनोखा कोलाज संग्रहालय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। पुरानी और विलुप्त होती वस्तुओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से तैयार इस संग्रहालय में ऐसी अनेक दुर्लभ सामग्रियां संजोकर रखी गई हैं, जो नई पीढ़ी को बीते दौर की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली से परिचित कराती हैं।

दुकानजी द्वारा इसे उत्तर प्रदेश का पहला अद्भुत कोलाज संग्रहालय बताया जा रहा है। संग्रहालय में दुनिया की सबसे छोटी बताई जाने वाली भगवद्गीता, कुरान और डिक्शनरी के अलावा वर्ष 1959 की वाटरप्रूफ साड़ी, 105 वर्ष पुराना नारियल, 60 वर्ष पुरानी लौकी, पुराने जमाने की घड़ियां, ट्रांजिस्टर, रेडियो, कैमरे, टेलीफोन, शंख, विभिन्न तीर्थस्थलों के पवित्र जल, प्राचीन सिक्के और डाक टिकट सहित अनेक ऐतिहासिक एवं दुर्लभ वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।

संग्रहालय की विशेषता यह है कि यहां रखी गई कई वस्तुएं लोगों द्वारा भेंट की गई हैं। दुकानजी ने इन सामग्रियों को बड़े करीने से सजाकर एक ऐसा संग्रह तैयार किया है, जो न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि प्रयागराज आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

 

संग्रहालय के विस्तार के लिए प्रशासन से भूमि आवंटन की मांग

राजेंद्र कुमार तिवारी दुकानजी ने प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी प्रयागराज, नगर निगम के महापौर और नगर आयुक्त से संग्रहालय के विस्तार एवं सौंदर्यीकरण के लिए दारागंज क्षेत्र में भूमि आवंटित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से थोड़ी भूमि उपलब्ध करा दी जाए तो संग्रहालय को और अधिक व्यवस्थित एवं भव्य स्वरूप दिया जा सकता है।

दुकानजी का प्रस्ताव है कि संग्रहालय उनके जीवनकाल तक उनके संरक्षण में रहे और उसके बाद इसे सरकार को सौंप दिया जाए, ताकि दुर्लभ एवं ऐतिहासिक वस्तुओं का संरक्षण भविष्य में भी होता रहे। इससे दारागंज को एक नई सांस्कृतिक पहचान मिलने के साथ प्रयागराज के पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकेगा।

लुप्त होती पुरानी वस्तुओं को बचाने का अनूठा प्रयास

दुकानजी का कहना है कि आधुनिकता के दौर में अनेक पुरानी वस्तुएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं। ऐसे में इन सामग्रियों को एक स्थान पर संरक्षित करना बेहद आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और पुरानी जीवनशैली को करीब से समझ सकें।

उन्होंने प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से भी इस अनूठे संग्रहालय के प्रचार-प्रसार में सहयोग की अपील की है, जिससे प्रयागराज आने वाले पर्यटकों को इसकी जानकारी मिल सके।

साथ ही आम नागरिकों से अपील की है कि जिनके पास पुरानी, दुर्लभ अथवा ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं सुरक्षित हैं, वे उन्हें संग्रहालय के लिए भेंट कर सकते हैं। इससे न केवल संग्रहालय की शोभा बढ़ेगी, बल्कि पुरानी धरोहरों को संरक्षित रखने का उद्देश्य भी पूरा होगा।

संपर्क सूत्र : 9919144420

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