फतेहपुर। रसोईघर में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की शुद्धता को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। दाल, मसाले, खाद्य तेल, दूध, पनीर, घी और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली तमाम खाद्य वस्तुओं में मिलावट की शिकायतें सामने आ रही हैं। बाजार में बिकने वाला सामान देखने में सामान्य हो सकता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद उपभोक्ता के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि आखिर भरोसा किस पर किया जाए।
दाल खरीदते समय कंकर या दूसरे अवांछित पदार्थ मिल जाना उपभोक्ता के लिए परेशानी की बात है। वहीं पिसे हुए मसालों में मिलावट का पता लगाना और भी मुश्किल होता है। धनिया पाउडर, मिर्च, हल्दी और अन्य मसालों में घटिया सामग्री मिलाए जाने की आशंका रहती है, क्योंकि पिसे हुए उत्पादों में मिलावट आसानी से नजर नहीं आती। इसलिए उपभोक्ता अक्सर पैकेट या दुकानदार के भरोसे ही खरीदारी करता है।
मिलावट के पीछे अधिक मुनाफा कमाने का लालच बड़ा कारण माना जा सकता है। किसी खाद्य पदार्थ में सस्ती सामग्री मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ा दी जाती है। फिर उसे असली उत्पाद के रूप में बाजार में बेच दिया जाता है। इससे मिलावट करने वाले को लागत कम रखने और मुनाफा बढ़ाने का अवसर मिलता है, जबकि इसकी कीमत उपभोक्ता को अपनी जेब और स्वास्थ्य दोनों से चुकानी पड़ सकती है।
खाद्य तेल भी ऐसा उत्पाद है, जिसकी गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता आसानी से फैसला नहीं कर सकता। तेल की शुद्धता केवल उसे देखकर या स्वाद से आंकना मुश्किल होता है। इसी तरह दूध और दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी रहती है। दूध, पनीर, खोया और घी जैसे उत्पादों की मांग बढ़ने के दौरान मिलावट की आशंका को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ जाती है।
इनसेट: पनीर से मसाले तक निगरानी की जरूरत
पनीर खरीदते समय आम ग्राहक के पास उसकी वास्तविक गुणवत्ता जांचने के सीमित साधन होते हैं। यही स्थिति दूध, घी और कई अन्य खाद्य पदार्थों की है। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता संदिग्ध है तो उपभोक्ता सामान्य तौर पर केवल शिकायत कर सकता है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम कार्रवाई करते हुए नमूना लेती है और उसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजती है। यहीं से एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता है कि जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया कितनी प्रभावी और समयबद्ध है।
इनसेट: त्योहारों में और बढ़ जाता है मिलावट का धंधा
त्योहारों और मांग बढ़ने वाले अवसरों पर दूध, पनीर, खोया, मिठाई, घी और अन्य खाद्य उत्पादों की खपत बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने निगरानी की चुनौती भी बढ़ना स्वाभाविक है। बाजार में आने वाली बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री की जांच और संदिग्ध उत्पादों पर तत्काल कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।
केवल त्योहारों के समय ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी बाजार की नियमित निगरानी जरूरी है। खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाने, उनकी जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि उपभोक्ता को संदिग्ध खाद्य सामग्री से तत्काल कैसे बचाया जाए।
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