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मुफ्त योजनाओं पर सख्त टिप्पणी: Supreme Court of India ने रोजगार पर दिया जोर

“भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने फ्रीबीज बांट रहे राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि आखिर करदाता के अलावा इन योजनाओं का खर्च और कौन उठाएगा। उन्होंने का कि भोजन और बिजली के बाद अब सीधा कैश ट्रांसफर होने लगा है। साथ ही अदालत ने कहा है कि सरकार को रोजगार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास पर अब कम खर्च किया जा रहा है।”

“गुरुवार को सीजेआई ने कर्ज के बाद भी राज्यों की तरफ से मुफ्त में चीजें बांटने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने सवाल किया, ‘आखिर करदाता नहीं, तो इन योजनाओं के लिए भुगतान कौन करेगा?’ सुप्रीम कोर्ट ने नकद बांटने और मुफ्त की सुविधाएं देने को लेकर वित्तीय समझदारी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने का कोर्ट का कहना है कि राज्यों को मुफ्त की रेवड़ियां या ‘डोल्स’ बांटने के बजाय रोजगार पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।”

“सीजेआई ने चेताया है कि विकास पर अब कम खर्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप मुफ्त खाना…, मुफ्त साइकिल…, मुफ्त बिजली देने लगेंगे… और अब तक सीधा कैश ट्रांसफर हो रहा है।’ सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा है कि कई राज्य राजस्व घाटे का सामना कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार किए हुए हैं। कोर्ट का मानना है कि कर्मचारियों के वेतन और ‘मुफ्त की सुविधाओं’ का बोझ इतना बढ़ गया है कि वे विकास के लिए जरूरी फंड को खत्म कर रहे हैं।”

“सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक साल में जुटाए गए राजस्व का 25 प्रतिशत हिस्सा…, इसे विकास में क्यों नहीं लगाया जा सकता?” “सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम बनाम भारत सरकार केस की सुनवाई कर रहा था। अदालत ने निगम को उपभोक्ता की वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना हर किसी को मुफ्त बिजली देने का वादा करने के लिए फटकार लगाई। कोर्ट ने मुफ्त की सेवा के कल्चर की कड़ी आलोचना की। साथ ही कहा कि यह आर्थिक विकास में बाधा डालती है।”

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