न्यूज़ वाणी ब्यूरो
फतेहपुर, 13 अक्टूबर। कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा गांधी सभागार में मंगलवार को जिलाधिकारी श्रीमती निधि गुप्ता वत्स की अध्यक्षता में जिला गंगा समिति एवं जिला पर्यावरण समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में गंगा घाटों की स्वच्छता, आगामी पर्वों की तैयारियों, जल संरक्षण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोकथाम सहित विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि गंगा घाटों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित कराई जाए। आगामी पर्वों को देखते हुए घाटों पर विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। मूर्ति विसर्जन के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप गड्ढों की खुदाई कराई जाए। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रकाश व्यवस्था, मोबाइल शौचालय और शुद्ध पेयजल सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
जल संरक्षण की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जून 2026 के बाद जिन सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं तथा भविष्य में प्रस्तावित कार्यों का विवरण संबंधित ‘जल संचयन जनभागीदारी’ पोर्टल पर दर्ज कराया जाए। साथ ही कार्ययोजना तैयार कर अन्य सरकारी भवनों में भी वर्षा जल संचयन की व्यवस्था विकसित की जाए।
उन्होंने ग्राम पंचायतों में लगे इंडिया मार्का हैंडपंपों और विद्यालयों के हैंडवॉश सिस्टम के पास सोख्ता गड्ढे बनवाने के निर्देश दिए, जिससे अधिक से अधिक जल का संरक्षण किया जा सके। इसके अलावा निर्मल गंगा, अविरल गंगा, जन गंगा, ज्ञान गंगा और अर्थ गंगा के अंतर्गत संचालित गतिविधियों को प्रभावी बनाने तथा गंगा किनारे बसे गांवों के किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
जिला पर्यावरण समिति की बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जैव चिकित्सा अपशिष्ट, ई-वेस्ट और सिंगल यूज प्लास्टिक की रोकथाम की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ नियमित अभियान चलाकर जब्ती और जुर्माने की कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए।
उन्होंने व्यापारियों एवं दुकानदारों को प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े और जूट के थैलों का प्रयोग करने के लिए जागरूक करने को कहा। साथ ही घर-घर से सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग एकत्र कर उसका नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। सभी मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटरों को पूर्ण क्षमता से संचालित कर उनकी प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को भी कहा।
जिलाधिकारी ने जैव चिकित्सा अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण पर विशेष जोर देते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निजी अस्पतालों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक माह कम से कम 15 अस्पतालों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
बैठक में पिछली कार्यवाही की पुष्टि करते हुए संबंधित विभागों को निर्धारित कार्यों में तेजी लाने और निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर डीएफओ, डीसी मनरेगा, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी गंगा सुरक्षा समिति ज्ञान तिवारी, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी, समिति के नामित सदस्य एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कुछ अधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से भी बैठक में प्रतिभाग किया।
News Wani
