चंडीगढ़। न्यूज़ वाणी। पंजाब में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति भी इस घटनाक्रम की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। पार्टी ने हाल ही में चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इसके बाद विधायकों के पार्टी छोड़ने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
रिपोर्टों के मुताबिक, पटियाला जिले की सनौर सीट से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना सीट से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। वहीं, अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने से राज्य में राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत मिल रहे हैं।
हरमीत सिंह पठानमाजरा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार पर दिल्ली के नेताओं का प्रभाव है और राज्य के नेताओं को फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता नहीं मिल रही है। उन्होंने प्रदेश में बढ़ते कर्ज, नशे की समस्या और किसानों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। वहीं, चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने नशे की समस्या, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और चुनावी वादों को पूरा नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई।
इस घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पंजाब में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने भाजपा पर दूसरी पार्टियों से निकाले गए या असंतुष्ट नेताओं को अपने साथ जोड़ने का आरोप लगाया। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने भी भाजपा की आलोचना की।
AAP की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा की विधानसभा सदस्यता रद्द कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष मामला उठाया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में दल-बदल और विधायकों की सदस्यता को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने का आगामी विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा। पंजाब में आम आदमी पार्टी जहां अपनी सरकार और संगठन को मजबूत बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं भाजपा इस घटनाक्रम को राज्य में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने के अवसर के रूप में देख सकती है
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