लखनऊ। नौकरी बहाली की मांग को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए एम्बुलेंस ड्राइवरों ने शनिवार को राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारी उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से नौकरी की मांग को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की जा रही है, लेकिन उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे कोरोना महामारी के दौरान एम्बुलेंस सेवाओं में तैनात रहे और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका आरोप है कि कोरोना काल में काम करने के बावजूद बाद में हजारों कर्मचारियों को रोजगार से बाहर कर दिया गया।
5 साल से नौकरी बहाली की मांग
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के मुताबिक, वर्ष 2021 से वे लगातार नौकरी बहाली की मांग उठा रहे हैं। उनका दावा है कि पिछले पांच वर्षों में वे कई बार उपमुख्यमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। कर्मचारियों का कहना है कि हर बार उन्हें समस्या के समाधान और नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग जिलों से करीब 9 हजार कर्मचारी इस रोजगार संकट से प्रभावित हैं। नौकरी की उम्मीद में कर्मचारी कई बार लखनऊ पहुंच चुके हैं।
मुलाकात का आश्वासन, फिर प्रदर्शनकारियों को रोका गया
कर्मचारियों ने बताया कि शुक्रवार को गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से शनिवार को उपमुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया गया था। इसी उम्मीद में वे शनिवार को डिप्टी सीएम के आवास पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वहां पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया और कुछ लोगों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने के लिए पहुंचे थे।
2012 से एम्बुलेंस सेवा में काम करने का दावा
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने बताया कि कई कर्मचारियों की नियुक्ति वर्ष 2012 में हुई थी। उन्होंने 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं में करीब नौ वर्षों तक काम किया। कर्मचारियों के अनुसार, वर्ष 2021 में निजी कंपनी के माध्यम से संचालित व्यवस्था में बदलाव के बाद करीब 9 हजार कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो गईं।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें नौकरी से हटाए जाने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और इसके बाद से वे लगातार रोजगार की मांग कर रहे हैं।
कोरोना काल में सेवा का हवाला
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जब लोग घरों से निकलने से डर रहे थे, उस समय एम्बुलेंस कर्मचारी मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में जुटे थे। कर्मचारियों ने खुद को कोरोना योद्धा बताते हुए कहा कि उस समय उनके काम को सम्मान मिला, लेकिन अब उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा है।
कुछ कर्मचारियों ने कोरोना काल के दौरान मिले मेडल और प्रमाणपत्र वापस करने की बात भी कही। उनका कहना है कि यदि सरकार उनकी नौकरी बहाल नहीं करती है तो वे लगातार आंदोलन जारी रखेंगे।
कर्मचारियों की प्रमुख मांग
एम्बुलेंस ड्राइवरों की मुख्य मांग पुरानी सेवाओं में नौकरी बहाल करने और रोजगार का स्थायी समाधान किए जाने की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हजारों परिवारों की आजीविका इस नौकरी पर निर्भर थी और लंबे समय से बेरोजगारी के कारण उनके सामने आर्थिक संकट बना हुआ है।
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