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सरस्वती विद्या मंदिर में गूंजा ‘वंदे मातरम्’, राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित हुआ भव्य कार्यक्रम

महोबा। शहर के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में शुक्रवार को राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम् के डेढ सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में विद्यालय के गुरूजनों और विद्यार्थियों ने एक स्वर में बुलंद आवाज से राष्ट्रीय गीत का गायन किया। इस मौके पर वक्ताओं ने वंदेमातरम् गीत की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, प्रधानाचार्य व अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण व दीप प्रज्जलित कर किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं विद्या भारती झांसी के संभाग निरीक्षक शिवकरण सिंह ने कहा कि वंदेमातरम् केवल एक गीत ही नहीं, बल्कि भारत माता की वंदना है। वंदेमातरम् गाते हुए हमे गर्व का अनुभव होता है। कहा कि भारत माता के अनेक सपूतों ने हंसते हंते वंदेमातरम् गाते हुए अपना बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम शब्द एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न और संकल्प है। वंदे मातरम, शब्द मां भारती की साधना और आराधना है। यह गीत आत्मविश्वास, वर्तमान व आत्मविश्वास से भर देता है और हमारे भविष्य को नया हौंसला देता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं जिसकी सिद्धि न हो सके। ऐसा कोई लक्ष्य नहीं, जो हम भारतवासी पा ना सकें।
प्राधानाचार्य कमलेश सिंह ने कहा कि हमारी धरती हरी भरी और फल फूलों से लदी हुई है। खतों में लहलहाती फसल से आच्छादित है। कहा कि हमारी भरत माता सबको प्रसन्नता प्रदान रकती है। कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का रचित यह गीत गुलामी के कालखंड में देशवासियों के लिए आशा की किरण और देशभक्ति की सबसे बड़ी प्रेरणा बना। इस गीत की पंक्तियां भारत की प्रकृति, मातृत्व, सौंदर्य और शक्ति का अद्भुत संगम हैं, जो देश को एकता के सूत्र में बांधती हैं। इस मौके पर समाजसेवी प्रेमचंद्र सोनी, कमलेशचंद्र, मुरली मनोहर तिवारी, ओमनारायण तिवारी, रणविजय, मनोज शिवहरे, शिवम सिंह के अलावा विद्यालय के शिक्षक व छात्र छात्राएं मौजूद रही। कार्यक्रम का संचालन संगीताचार्य पंडित जगप्रसाद तिवारी ने किया। अंत में प्रधानाचार्य ने सभी आए हुए अतिथियों का अभार व्यक्त किया।

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