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ब्राह्मण सम्मेलन में अखिलेश यादव का सरकार पर हमला, बोले- PDA में पंडित और पीड़ित दोनों साथ हैं

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ में आयोजित प्रबुद्धजन (ब्राह्मण) सम्मेलन में भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग लगातार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की नई-नई परिभाषाएं गढ़ रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि PDA में पंडित और पीड़ित दोनों साथ हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारधारा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की पक्षधर है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि यह दोस्ती हजारों वर्षों से समानता, सम्मान और विश्वास का प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि समाज में सभी वर्गों के बीच इसी तरह का सम्मान और सहयोग होना चाहिए।

उन्होंने शंकराचार्य से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि देश के इतिहास में पहली बार किसी शंकराचार्य को धार्मिक अनुष्ठान और स्नान से रोका गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में बटुकों का भी अपमान हुआ और धार्मिक परंपराओं को ठेस पहुंची। उनका आरोप था कि विरोध की आवाज दबाने के लिए कानूनी कार्रवाई का भी सहारा लिया गया, लेकिन धार्मिक नेतृत्व अपने रुख पर कायम रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत समाजवादी विचारक जनेश्वर मिश्र की जयंती पर श्रद्धांजलि के साथ हुई। अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र पार्क पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। भीड़ अधिक होने के कारण कुछ देर के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, जिसे सुरक्षाकर्मियों ने नियंत्रित किया।

अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क निर्माण, रोजगार, शिक्षा, किसानों की समस्याओं और महंगाई जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं हो रही हैं और किसानों को खाद जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।

सम्मेलन में समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और प्रदेशभर से आए ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। नेताओं ने सामाजिक समरसता, संगठन की मजबूती और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की रणनीति पर भी अपने विचार रखे। सम्मेलन के माध्यम से समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण समाज के साथ संवाद बढ़ाने और उनकी भागीदारी मजबूत करने का संदेश देने का प्रयास किया।

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