नई दिल्ली। देशभर में नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर बढ़ते विरोध और दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के लगातार जारी धरना-प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार आज होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में पेपर लीक और संगठित नकल पर रोक लगाने के उद्देश्य से नए एवं अधिक कठोर कानूनी प्रावधानों को मंजूरी देने पर विचार कर सकती है। यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है, तो देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। लाखों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। इसी बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी सरकार से दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं पर स्थायी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार मौजूदा कानूनों की समीक्षा कर उन्हें और प्रभावी बनाने की तैयारी में है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत पेपर लीक, नकल और परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों को गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में लाने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल हो सकता है, ताकि वर्षों तक मुकदमे लंबित न रहें और दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र लीक करने, नकल कराने, परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी छेड़छाड़ करने या संगठित गिरोह के माध्यम से परीक्षा को प्रभावित करने का दोषी पाया जाता है, तो उसके लिए वर्तमान से अधिक कठोर कारावास और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि कड़ी सजा से ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी और परीक्षा माफिया पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
सरकार परीक्षा संचालन में आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग पर भी जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT), सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र वितरण, बायोमेट्रिक सत्यापन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी जैसी व्यवस्थाएं अपनाने से पेपर लीक और नकल की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसी दिशा में केंद्र सरकार विभिन्न परीक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर तकनीकी सुधारों पर भी कार्य कर रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कानून सख्त कर देना पर्याप्त नहीं होगा। परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण—प्रश्नपत्र तैयार करने, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन—में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। इसके साथ ही परीक्षा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रूप से तय करनी होगी, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
नीट पेपर लीक विवाद के बाद देशभर के छात्रों में असंतोष का माहौल है। अनेक छात्र संगठनों का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग जाए तो सबसे अधिक नुकसान ईमानदार अभ्यर्थियों का होता है। उनका मानना है कि सरकार को केवल दोषियों को दंडित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी मजबूत व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिसमें भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना ही समाप्त हो जाए।
यदि कैबिनेट बैठक में प्रस्तावित कानून को मंजूरी मिलती है, तो इसके बाद संबंधित विधेयक को संसद में पेश किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। संसद की मंजूरी मिलने के बाद नए प्रावधान पूरे देश में लागू किए जा सकेंगे। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में एक समान और अधिक कठोर कानूनी व्यवस्था लागू होने की उम्मीद है।
देशभर के लाखों छात्र, अभिभावक और शिक्षा विशेषज्ञ अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं। सभी की अपेक्षा है कि सरकार ऐसे प्रभावी और व्यावहारिक उपाय लागू करेगी, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे तथा प्रतिभाशाली छात्रों का भविष्य किसी भी प्रकार की अनियमितता से प्रभावित न हो। जंतर-मंतर पर जारी छात्रों का आंदोलन भी इसी मांग को लेकर केंद्रित है कि परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाई जाए। आने वाले दिनों में कैबिनेट के निर्णय और उसके बाद की विधायी प्रक्रिया इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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